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Monday, 26 October 2026
भोपाल

मानव जीवन के समग्र विकास का उपक्रम है योग

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भोपाल – योग हजारों साल पुरानी विधा है। यह केवल शारीरिक विकास ही नहीं बल्कि मानव जीवन के समग्र विकास का उपक्रम है। योग ने जीवन जीने के पद्धति विकसित की है। मनुष्य का प्रकृति के साथ संबंध का भाव योग से ही प्रारंभ हुआ है। श्रेष्ठ पद्धति से श्रेष्ठ जीवन जीने का उपक्रम योग ही है। यह बात स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने आज रविंद्र भवन, भोपाल में एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय योग ओलंपियाड 2023 के समापन समारोह में कही।

राज्य मंत्री  परमार ने कहा कि यहाँ लघु भारत का दृश्य दिख रहा है। हमारा संकल्प देश को एकात्मकता के भाव के साथ एक करना है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने योग को पुनः उच्च स्थान दिलाया है। आज योग भारत ही नहीं विश्व भर में प्रसिद्धि पा रहा है। हम प्रदेश के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में योग को शामिल कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भारतीय शिक्षा दर्शन, गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सही संदर्भ में बच्चों तक पहुँचायेंगे। उन्होंने कहा कि देश को विश्व में सिरमौर बनाने में योग का महत्वपूर्ण योगदान होगा। संकल्प लेकर आगे बढ़े कि हम वैभवशाली, गौरवशाली, सर्वसंपन्न, सर्वशक्तिशाली एवं दुनिया का भरण पोषण करने वाले विश्वगुरु भारत के पुनर्निमाण के चित्रकार हैं। आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 में ज्ञान के क्षेत्र में भारत विश्वमंच पर विश्वगुरु होगा।

राज्य मंत्री  परमार ने तीन दिवसीय योग ओलंपियाड में प्रतिभागिता कर विजयी हुए बच्चों को पुरुस्कार वितरण भी किया। निदेशक एनसीईआरटी प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी एवं समन्वयिका श्रीमती गौरी श्रीवास्तव सहित देश भर के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए 600 से अधिक प्रतिभागी बच्चे एवं उनके गुरुजन उपस्थित रहे। संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक पालीवाल ने आभार माना।

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