-ग्रामीणों के सहयोग से भू-माफियाओं पर कसा शिकंजा
-मुक्त कराई गई भूमि पर होगा पौधारोपण, जंगलों को फिर बनाया जाएगा हरा-भरा
अनोखा तीर, भैरुंदा। वर्षा ऋतु के प्रारंभ होते ही वन भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे खेती योग्य बनाने की कोशिशों पर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। वन परिक्षेत्र लाड़कुई अंतर्गत वन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर कुल 15.699 हैक्टेयर लगभग 39 एकड़ शासकीय वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस दौरान अवैध कब्जे हटाए गए और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत वन अपराध प्रकरण भी दर्ज किए गए। वन विभाग के अभियान के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम पटेलों और ग्रामीणों ने वन विभाग का खुलकर सहयोग किया। जिसके कारण कई स्थानों पर बिना किसी विवाद के वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सका। वनमंडल अधिकारी श्रीमती अर्चना पटेल एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रकाश चंद्र उईके ने बताया कि वन भूमि को अतिक्रमणकारियों के चुंगल से छुडाने के लिए वन क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष निगरानी दलों का गठन किया। वर्षा ऋतु में वन माफियाओं द्वारा झाड़ियां साफ कर वन भूमि पर हल-बखर चलाकर खेती शुरू करने की कोशिशों को देखते हुए वन अमले को लगातार गश्त और कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी के तहत लाड़कुई परिक्षेत्र के किशनपुर, पिपलानी एवं नयापुरा बीट में लगातार अभियान चलाया गया।
किशनपुर, पिपलानी ,नयापुरा के जंगलों से हटाया अतिक्रमण
बीते 12 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिलने पर वन विभाग ने किशनपुर बीट के कक्ष क्रमांक 353 आरएफ में कार्रवाई दल भेजा। इस दौरान वन विभाग के ओम कुमार गोयल परिक्षेत्र सहायक पिपलानी, कमलसिंह बीट गार्ड किशनपुर, संजीत अहिरवार बीट प्रभारी पिपलानी, संतोष वर्मा बीट प्रभारी डोंगलापानी, प्रेम सागर बागवान बीट प्रभारी खजूरपानी मौके पर पहुंचे तो कुछ लोगों ने झाड़ियां साफ कर हल-बखर चलाकर फसल की बुआई कर दी थी। वन विभाग ने तत्काल पूर्व जनपद सदस्य पर्वत सिंह उईके ग्राम पटेल और आसपास के ग्रामीणों को मौके पर बुलाया। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग से पांच अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जाई गई 5.237 हैक्टेयर वन भूमि को गहरे गड्ढे खुदवाकर पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया गया। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। वन विभाग ने 26 जून को पिपलानी बीट के कक्ष क्रमांक 369 आरएफ में भी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से वन भूमि की जुताई कर रहे बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के महिंद्रा ट्रैक्टर को हल-बखर सहित जब्त किया। चालक जगदीश पिता नाहर सिंह निवासी सिराड़ी से वन भूमि पर खेती के संबंध में दस्तावेज मांगे गए। लेकिन उसके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। विभाग ने 0.337 हैक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण हटाते हुए आरोपी के विरुद्ध भी वन अपराध का मामला दर्ज किया। वन विभाग ने बताया कि इसी अभियान के तहत पूर्व में नयापुरा बीट के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में भी कार्रवाई की गई थी। यहां 9 अतिक्रमणकारियों द्वारा 10.125 हैक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा कर जुताई और बुआई कर दी गई थी। विभाग ने जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर, पालतू पशुओं से चराई कराकर तथा अवैध फसल नष्ट कर पूरी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया था।
मुक्त कराई गई भूमि पर होगा पौधारोपण
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाना ही अभियान का अंतिम उद्देश्य नहीं है। अतिक्रमण मुक्त कराई गई पूरी वन भूमि पर आगामी दिनों में बड़े स्तर पर पौधारोपण कराया जाएगा, ताकि जंगलों का विस्तार हो सके और वन क्षेत्र फिर से हरा-भरा बन सके। विभाग का मानना है कि खाली छोड़ी गई भूमि पर दोबारा कब्जे की आशंका रहती है, इसलिए पौधारोपण के माध्यम से उसे स्थायी रूप से सुरक्षित किया जाएगा।
अब लकड़ी चोरों और वन संपदा नष्ट करने वालों पर भी होगी सख्ती
वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रकाश चंद्र उईके ने बताया कि वन विभाग का अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी कीमत पर वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए दिन-रात सघन गश्त की जा रही है तथा अलग-अलग सुरक्षा दल गठित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विभाग अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले, अवैध रूप से पेड़ों की कटाई करने वाले तथा लकड़ी की चोरी करने वाले लोगों के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। जंगलों की लगातार हो रही अवैध कटाई को रोकने के लिए वन विभाग ने विशेष गश्ती दल तैयार कर दिए हैं, जो दिन के साथ-साथ रात्रि गश्त भी करेंगे। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और वन अपराध में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई कर दंडित कराया जाएगा। वन विभाग ने क्षेत्रवासियों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी वन भूमि पर अतिक्रमण, अवैध कटाई या वन संपदा को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां दिखाई दें तो तत्काल विभाग को सूचना दें। विभाग का कहना है कि जनसहयोग से ही जंगलों को सुरक्षित रखा जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत बचाई जा सकती है। अतिक्रमण हटाने में विशेष रूप से ग्रामीण पर्वत सिंह उईके,हुकम सिंह राजपूत,सुरेश यादव,राम प्रसाद यादव ,मानसा राम यादव , ब्रज लाल विश्वकर्मा,अमर सिंह यादव ,बंशी लाल यादव ,मनोहर सरयाम, माखन सिंह सरयाम, बदामी लाल कोटवार, बद्री प्रसाद हरियाले , रेम सिंह बारेला, हिरमल बारेला, दुले सिंह पटेल , मोजी राम यादव, जय प्रकाश यादव , अजय सिंह उईके सहित रघुवीर यादव का विशेष सहयोग रहा।





