-आईएफएस की दौड़ में अफसरों पर सवाल
-19 अक्टूबर की डीपीसी में करीब एक दर्जन अधिकारियों के लिफाफे बंद होने की आशंका
-पिछली पदोन्नति के विवाद से फिर बढ़ी निगरानी
गणेश पांडे, भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्य वन सेवा (एसएफएस) से भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में पदोन्नति की प्रक्रिया इस बार अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और विभागीय जांच के कारण चर्चा में है। आईएफएस बनने की कतार में खड़े कुछ अधिकारियों पर वन कटाई, कथित आर्थिक अनियमितताओं और वन्यजीव अपराधों से जुड़े आरोप हैं, जबकि एक अधिकारी हाथियों की मौत के मामले में निलंबित भी हो चुके हैं। 19 अक्टूबर को प्रस्तावित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में करीब एक दर्जन अधिकारियों के लिफाफे बंद रखे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित मामलों की स्थिति और लागू सेवा नियमों के आधार पर होगा। वन विभाग ने एसएफएस से आईएफएस में पदोन्नति के लिए 26 अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजे हैं। इनमें 2009 से 2016 बैच तक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें 2009 बैच के रामकुमार अवधिया और मनोज कटारिया, 2011 बैच की प्रियंका चौधरी और सुरेश कुमार अहिरवार, 2012 बैच के संतोष कुमार रनसोरे, मनीषा पुरवार, प्रमोद सिंह बालकराम सिरसाम, मानसिंह मरावी और एल्विन वर्मन तथा 2014 बैच के प्रदीप कच्छवा, फतेह सिंह निनामा, राकेश लहरी और अंतर सिंह ओहरिया, 2015 बैच के संजीव कुमार शर्मा, धीरज सिंह चौहान, गंगा प्रसाद कुदारे 2016 बैच के अविनाश जोशी, हमीदुल्लाह खान, संजय पाठक, संदेश महेश्वरी, संदीप कुमार गौतम, जितेंद्र गुप्ता, संतोष कुमार शुक्ला और 2016 बैच के राजेश शर्मा एवं राहुल मिश्रा सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों के मामलों में आरोपों की प्रकृति, जांच की वर्तमान स्थिति और लागू सेवा नियमों के आधार पर ही पदोन्नति संबंधी निर्णय होना है।
वन कटाई से वन्यजीव अपराध तक, गंभीर आरोपों की चर्चा
2012 बैच के बालकराम सिरसाम पर बालाघाट में बाघ के शिकारियों को कथित संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। इसी बैच के मानसिंह मरावी का नाम करीब ढाई करोड़ रुपये मूल्य के सागौन के पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में सामने आया है। वहीं, 2014 बैच के फतेह सिंह निनामा बांधवगढ़ में हाथियों की मौत के मामले में निलंबित हो चुके हैं। इन मामलों में आरोपों और जांच की वर्तमान स्थिति के आधार पर ही पदोन्नति संबंधी निर्णय लिया जाना है।
ओहरिया के मामले में एफआईआर प्रस्ताव पर भी नजर
संभावित रूप से लिफाफे बंद रखे जाने वाले अधिकारियों में रामकुमार अवधिया, मनोज कटारिया, प्रियंका चौधरी, सुरेश कुमार अहिरवार, संतोष कुमार रनसोरे, बालकराम सिरसाम, मानसिंह मरावी, एल्विन वर्मन, प्रमोद सिंह, मनीषा पुरवार और अंतर सिंह ओहरिया के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें अंतर सिंह ओहरिया का मामला भी चर्चा में है। उन पर कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अपने नाते-रिश्तेदारों के खातों में डेढ़ लाख रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित करने के आरोप हैं। मामले में एफआईआर दर्ज कराने का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिलने की बात कही जा रही है। इस मामले में प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति और विभागीय रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
पिछली पदोन्नति का विवाद फिर बना कसौटी
पिछली पदोन्नति प्रक्रिया में संतोष कुमार रनसोरे, बालकराम सिरसाम और मानसिंह मरावी के मामलों को लेकर सवाल उठे थे। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी प्रतिकूल जानकारियां समय पर सामने नहीं आईं। रामकुमार अवधिया की केंद्रीय सतर्कता आयोग और यूपीएससी में की गई शिकायतों के बाद मामला विवादों में आया। बताया गया कि अंतिम अधिसूचना में तीनों अधिकारियों के नाम शामिल नहीं हुए और उन्हें राज्य वन सेवा में वापस भेजना पड़ा था।
वन कटाई, टाइगर शिकारियों को संरक्षण से लेकर हाथी की मौत तक के आरोप




