–बादाम-काजू के दामों में भी उछाल, महंगाई से आम आदमी की थाली पर संकट
-जरूरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
-सीमित कमाई में घर चलाना हुआ मुश्किल
अनोखा तीर, मसनगांव। महंगाई की मार से आम आदमी को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। कभी शक्कर के दाम बढ़ रहे हैं तो कभी दाल और चावल की कीमतें जेब पर भारी पड़ रही हैं। अब शक्कर के भाव फिर 58 रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं, जबकि अरहर की दाल 150 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। फुटकर बाजार में इसके दाम करीब 160 रुपए तक बताए जा रहे हैं। इसी प्रकार चना दाल 80 से बढ़कर 100, मूंग दाल 120 से बढ़कर 140 रुपए किलो बिक रही है। चावल से लेकर बादाम और काजू तक की कीमतों में बढ़ोतरी ने रसोई का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि सीमित आमदनी वाले परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
पहले घटे, अब फिर बढ़ने लगे शक्कर के दाम
शक्कर के दामों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। पिछले दिनों शक्कर के भाव करीब 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। इसके बाद कीमतें घटकर 50 रुपए के आसपास आईं, लेकिन अब फिर बढ़कर 58 रुपए के पार पहुंच गई हैं। फुटकर दुकानों पर शक्कर 60 से 62 रुपए प्रति किलो तक बेची जा रही है। बार-बार बदलते भाव के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद भी कमजोर पड़ रही है।
दाल-चावल भी आम आदमी की पहुंच से दूर
रसोई की सबसे जरूरी खाद्य वस्तुओं में शामिल अरहर की दाल के भाव में भी तेजी आई है। करीब 120 रुपए प्रति किलो मिलने वाली दाल अब 150 रुपए तक पहुंच गई है। फुटकर बाजार में इसके भाव करीब 160 रुपए प्रति किलो बताए जा रहे हैं। वहीं, चावल के दाम भी 80 रुपए से बढ़कर 90 से 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इन कीमतों के चलते परिवारों का मासिक राशन बजट लगातार बढ़ रहा है। जो खाद्य सामग्री पहले सामान्य घरेलू खर्च का हिस्सा थी, अब उसी की खरीदारी के लिए भी अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है।
बादाम 1200 तो काजू 1100 रुपए किलो
महंगाई का असर सूखे मेवों पर भी दिखाई दे रहा है। बादाम के भाव 900 रुपए से बढ़कर 1200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इसी तरह काजू की कीमत 900 रुपए से बढ़कर 1100 रुपए प्रति किलो हो गई है। कीमतों में इस बढ़ोतरी से सूखे मेवे आम उपभोक्ताओं की पहुंच से और दूर होते जा रहे हैं।
कमाई सीमित, खर्चों का बोझ लगातार बढ़ा
महंगाई की सबसे ज्यादा मार गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रही है, जिनकी आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने के बावजूद खाद्य सामग्री की कीमतें बढ़ने से घर का बजट गड़बड़ाने लगा है। राशन, सब्जी और दूसरी घरेलू जरूरतों पर खर्च बढ़ने से परिवारों को अन्य आवश्यकताओं में कटौती करनी पड़ रही है। कई परिवार महंगी खाद्य सामग्री के कारण अपने खानपान में बदलाव करने को मजबूर हैं।
कीमतों पर निगरानी और राहत के कदम जरूरी
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बाजार में कीमतों की निगरानी और उचित कार्रवाई की जरूरत है। हालांकि, किसी वस्तु के दाम बढ़ने के पीछे आपूर्ति, मांग और अन्य बाजार कारण भी हो सकते हैं, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए जरूरी है कि उसे उचित कीमत पर सामान उपलब्ध हो। प्रशासन और संबंधित विभागों को बाजार की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, ताकि अनावश्यक मूल्यवृद्धि और निर्धारित नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जा सके। महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के अभाव में आम परिवारों की रसोई का बजट और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।







