– ‘बोलो, बताओ, बचाओ थीम पर बच्चों को सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श, बाल अधिकारों और साइबर सुरक्षा की दी जानकारी
अनोखा तीर, हरदा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा प्रारंभ किए गए ‘सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विद्यालयों में बाल सुरक्षा एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में 4 नवंबर 2026 को आयोजित इन शिविरों की थीम ‘बोलो, बताओ, बचाओ रही। अभियान का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, व्यक्तिगत सुरक्षा, अपने अधिकारों और किसी भी अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के प्रति जागरूक करना था। नगर के द फाउंडेशन ऑफ एजुकेशन स्कूल में आयोजित शिविर में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश निमिष राजा ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुसार शारीरिक सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं तथा सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। किसी भी असहज या अनुचित व्यवहार की स्थिति में बच्चों को बिना डर और संकोच के अपनी बात किसी विश्वसनीय व्यक्ति तक पहुंचानी चाहिए। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी संजीव रहांगडाले ने विद्यार्थियों को सरल एवं संवादात्मक तरीके से समझाया कि प्रत्येक बच्चे को अपने शरीर की सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता बनाए रखने का अधिकार है। उन्होंने सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर बताते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार असहज महसूस कराता है तो बच्चे को अपनी असहमति जताने और वहां से दूर जाने का पूरा अधिकार है। शासकीय कन्या उमा विद्यालय हरदा में आयोजित शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लवकेश सिंह ने बच्चों को शरीर के निजी अंगों की सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बच्चों की इच्छा के विरुद्ध छूने या ऐसा करने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। बच्चों को अनुचित व्यवहार के प्रति सजग रहने और ऐसी स्थिति में तत्काल सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर राठौर ने बच्चों को बताया कि किसी परेशानी या असुरक्षित स्थिति में वे अपने माता-पिता, अभिभावकों अथवा परिवार के विश्वसनीय सदस्यों से मदद ले सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों को भी बाल सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता बताई। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, भय, चुप्पी, असहजता या किसी व्यक्ति विशेष से डरने जैसे संकेतों पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों की बात गंभीरता और धैर्य से सुनना, उनकी निजता का सम्मान करना तथा शिकायत मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाना जरूरी है। जिला विधिक सहायता अधिकारी सौरभ कुमार दुबे ने बच्चों को विभिन्न सहायता एवं आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने बाल शोषण संबंधी सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 तथा नि:शुल्क विधिक सहायता के लिए 15100 हेल्पलाइन नंबर के उपयोग के बारे में बताया। शिविरों में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा साइबर विभाग के प्रतिनिधियों ने भी विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, संरक्षण, ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी। इस दौरान संवाद सत्र आयोजित कर बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। इसी क्रम में तहसील विधिक सेवा समिति टिमरनी के अंतर्गत शासकीय कन्या उमा विद्यालय एवं शासकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय टिमरनी तथा तहसील विधिक सेवा समिति खिरकिया के अंतर्गत सेंट ज्यूड्स को-एड स्कूल छीपाबड़ और शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल चौकड़ी में भी जागरूकता शिविर आयोजित किए गए।







