अनोखा तीर, हरदा।सरकारने किसानों से वादे बड़े-बड़े किए थे, लेकिन किसान अपने हक के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। किसानों को चार माह में समय पर यूरिया एवं डीएपी खाद नहीं मिलने से खरीफ की मक्का फसल में भी भारी नुकसान हुआ है। किसान चार माह से खाद के लिए लाइन में लगा है लेकिन किसान खाली हाथ बैठा है। किसानों की सोयाबीन की कटाई शुरू हो गई है, उड़द की फसल कट चुकी है, किसानों को मक्का एवं चने की बोनी करना है लेकिन आज तक किसानों को खाद नहीं मिली, किसान कैसे खेती करेगा। सरकार ने किसानों से कहा था कि खेती को लाभ का धंधा बनाएंगे, किसानों की आय 2022 तक दोगुनी कर देंगे, क्या हुआ, किसानों की उपज के दाम वहीं है, लेकिन खाद चाहे एनपीके हो चाहे 20:20:0:13 इनके भाव 50 किलो की बोरी पर 1000 रुपए भाव बढ़ा दिए हैं, किसान कैसे खेती करेंगे। विगत 8 दिन से लगातार जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से बात करने के बाद भी ई-टोकन प्रणाली में कोई सुधार नहीं किया है। प्रतिदिन मात्र 30 मिनट के लिए टोकन जनरेट करने के लिए साइट चालू की जा रही है वो भी सब सेटिंग से कि किन किसानों के टोकन बुक करना है, जमकर कालाबाजारी की जा रही है, जिला कलेक्टर को गुमराह किया जा रहा है। डीडीए प्रकाश ठाकुर को विगत चार माह में जो खाद यूरिया एवं डी ए पी कितना आया था और किन-किन किसानों को दिया सार्वजनिक करना चाहिए, अन्यथा स्वीकार करना चाहिए कि जिले में कालाबाजारी हो रही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहन साई ने कहा है कि 4 अक्टूबर तक किसानों को खाद वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो 5 अक्टूबर से जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रतिदिन 11 बजे से 5 बजे तक धरना दिया जाएगा, इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की रहेगी।
आखिर किसान ही सड़क पर क्यों







