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Friday, 23 October 2026
देवास

जैन संत आचार्य वीररत्न सूरीश्वरजी पंच तत्व में विलिन

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देवास जिले के शिवपुर तीर्थ में हुआ अग्नि संस्कार

देवास- जैन जगत के महान गुरू एवं हजारों भक्तों की श्रद्धा के केन्द्र शिवपुर तीर्थ अधिष्ठाता एवं माणिभद्र वीर के परम साधक पूज्य आचार्य  वीररत्न सूरीश्वरजी म.सा.  पंच तत्व में विलिन हो गए। आपके अग्नि संस्कार के चढ़ावे में गुरू भक्तों ने बढ़चढ़ कर उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया। आप तेजस्वी साहित्यकार एवं औजस्वी प्रवचनकार थे। 71 वर्ष के साधनाकाल में 45 वर्षो से लगातार आप मालव भूमि में विचरण कर रहे थे।  देवास के टेकरी स्थित जैन मंदिर, शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर के देवगुरू मंदिर सहित भारत भर में आपके द्वारा 300 जैन मंदिर, धर्मशाला, आराधना भवन एवं गुरूकुल का निर्माण कराया गया। इस महान शिल्पकार ने भारत भर के हजारों गुरू भक्तों के हृदय में आस्था की ऐसी ज्योत जलाई जो बरसों बरस तक स्मृति में रहेगी। अंतिम संस्कार में मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र, राजस्थान, मारवाड़, छत्तीसगढ़ सहित देश के कोने कोने से हजारों गुरू भक्त उपस्थित हुए।

नम आंखों से भक्तों ने अपने प्यारे गुरू को अंतिम विदाई दी। प्रवक्ता विजय जैन ने बताया कि आचार्य श्री का जन्म 28 फरवरी 1952 को राजस्थान के सिरोही जिले के पिंडवाडा में हुआ था। बचपन के इस उत्तम कुमार ने मात्र 11 वर्ष 6 माह की आयु में ही गृहस्थ जीवन का परित्याग कर दिया था। संयम का मार्ग स्वीकार कर आप मुनि  वीररत्न विजयजी बने थे। आपको प्रथम दीक्षा आचार्य श्री प्रेम सुरीश्वरजी म.सा. ने दिलवाई थी। आचार्य  भुवनभानु सुरीश्वरजी के सुशिष्य बनकर आपने मालवा प्रांत को अपनी कर्म स्थली एवं साधना स्थली बनाया। मालवा प्रांत में आपकी प्रेरणा से शिवपुर मातमोर तीर्थ, देवास में टेकरी स्थित शत्रुंजयावतार आदेश्वर तीर्थ, मक्सी पाश्र्वनाथ तीर्थ का जीर्णोद्धार, कामित पूरण पाश्र्वनार्थ तीर्थ उन्हेल, तिलक नगर पाश्र्वनाथ तीर्थ इंदौर, शंखेश्वर धाम राऊ, ओएसिस तीर्थ इंदौर सहित कई अन्य प्रांत में भी विशाल निर्माण कार्य करवाकर एक अमिट इतिहास का सृजन किया।
आगामी आयोजन
पूज्य गुरूदेव को भावांजलि अर्पित करने हेतु समग्र जैन समाज देवास की गुणानुवाद सभा का आयोजन  शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर तुुकोगंज रोड पर 18 जुलाई मंगलवार को प्रात 9.15 बजे रखा गया है। जिसमें समग्र जैन समाज एवं अन्य समाज के गुरू भक्त उपस्थित रहेंगे।

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