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Wednesday, 28 October 2026
हरदा

सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य समापन

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-विश्व शांति और प्राणी मात्र के कल्याण के लिए किया हवन

अनोखा तीर, हरदा। श्री दिगंबर जैन समाज हरदा के तत्वावधान में आयोजित सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का 16 दिनों की धार्मिक आराधना, भक्ति और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के पश्चात श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। समापन अवसर पर समाज के श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हवन, पूजन-पाठ एवं धार्मिक क्रियाएं संपन्न कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और प्राणी मात्र के कल्याण की मंगल कामना की। पूरे आयोजन के दौरान जैन मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान श्री शांतिनाथ की आराधना में लीन रहे। समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि सोलह दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन पुण्यार्जक परिवारों की सहभागिता से श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का विधि-विधानपूर्वक पूजन किया गया। नित्य नियम पूजन के साथ प्रात:काल बृहद शांतिधारा, विधान मंडल पूजन, अभिषेक एवं अन्य धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से भगवान की आराधना की गई। प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजन-पाठ में सहभागिता कर धर्मलाभ लिया।
अंतिम दिन सामूहिक हवन में शामिल हुए समाजजन
विधान के अंतिम दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत हवन क्रिया संपन्न हुई। इसमें सोलह दिनों तक पुण्यार्जक के रूप में विधान में सहभागी रहे सभी परिवारों सहित समाज के श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। हवन में आहुतियां अर्पित कर विश्व में शांति, मानव जीवन में सुख-समृद्धि, सभी जीवों के प्रति करुणा और समस्त प्राणियों के कल्याण की भावना व्यक्त की गई। धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुए समापन कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे सोलह दिवसीय आयोजन की धार्मिक क्रियाएं एवं विधान की संपूर्ण प्रक्रिया पंडित मनोज पुजारी के मार्गदर्शन और निर्देशन में संपन्न हुई। उन्होंने विधि-विधान के अनुसार पूजन, हवन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। समाजजनों ने सोलह दिनों तक निरंतर भक्ति भाव के साथ भगवान शांतिनाथ की आराधना की और धर्म, अहिंसा, शांति तथा विश्व कल्याण का संदेश आत्मसात किया।
नर्मदा नदी के भूगर्भ से प्रकटित प्राचीन प्रतिमा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
हरदा नगर के दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान भगवान श्री शांतिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के प्रति समाजजनों की गहरी आस्था है। समाजजनों के अनुसार यह प्रतिमा नर्मदा नदी के भूगर्भ से स्वयं प्रकटित हुई चतुर्थकालीन प्रतिमा है। श्रद्धालु भगवान शांतिनाथ को अतिशयकारी मानते हैं और उनकी आराधना को मनोकामना पूर्ति, आत्मिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति से जोड़कर देखते हैं। इसी अटूट श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सोलह दिनों तक शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया गया। प्रतिदिन की शांतिधारा, अभिषेक, पूजन-पाठ और विधान मंडल की आराधना ने समाज के धार्मिक वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाए रखा।
धर्म, भक्ति और विश्व कल्याण की भावना के साथ हुआ समापन
सोलह दिवसीय विधान का समापन केवल एक धार्मिक आयोजन की पूर्णता नहीं, बल्कि समाज में धर्म, अहिंसा, संयम, करुणा और विश्व शांति की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर भी बना। श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के चरणों में नमन कर सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना की। श्री दिगंबर जैन समाज हरदा का यह आयोजन श्रद्धा, सामूहिक सहभागिता और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का सुंदर उदाहरण रहा। सोलह दिनों तक चली आराधना के पश्चात हवन एवं पूजन के साथ विधान का विधिवत समापन हुआ और मंदिर परिसर भगवान शांतिनाथ की भक्ति एवं जयकारों से गुंजायमान रहा।

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