अनोखा तीर, खिरकिया। श्री संघ खिरकिया में नवपद ओलीजी की नौ दिवसीय पावन आराधना का समापन दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं धर्ममय वातावरण में पारणा महोत्सव के रूप में मनाया गया। यह आयोजन मांगलिक भवन में हुआ। इस पावन आराधना के लाभार्थी सुचिता मुकेश भंडारी रहे। परिवार ने अपनी सुपुत्रियों भाव्या एवं सिमरन की पावन स्मृति में इस धर्माराधना का आयोजन करवाकर उनकी स्मृतियों को तप, त्याग एवं पुण्य की भावना से जोड़ा। नवपद ओलीजी की आराधना जैन धर्म में आत्मशुद्धि, संयम एवं आध्यात्मिक उन्नति का विशेष महत्व रखती है। नौ दिनों तक ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप की आराधना के माध्यम से तपस्वियों ने धर्मसाधना का लाभ लिया। इस आयोजन ने पूरे श्री संघ में भक्ति, श्रद्धा और तप अनुमोदना की भावना को सुदृढ़ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ छाया भंडारी द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। श्री संघ एवं लाभार्थी परिवार द्वारा नवपद ओलीजी की आराधना करने वाले तपस्वियों का सम्मान एवं बहुमान किया गया। तपस्वियों के त्याग, तपस्या और धर्म के प्रति समर्पण की अनुमोदना करते हुए सभी ने उनके आध्यात्मिक पुरुषार्थ की सराहना की। इस अवसर पर मौसमी भंडारी, आशीष समदड़िया एवं रश्मि श्रीश्रीमाल ने अपने भाव व्यक्त किए। श्री संघ अध्यक्ष अनिल मुनोट ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सुधा भंडारी एवं शालू भंडारी ने किया। स्व. चंदा देवी अमरचंद मेहता, लतादेवी रमणलाल सांड एवं अन्य परिवारों द्वारा भी बहुमान किया गया। इस अवसर पर संघ अध्यक्ष अनिल मुनोट, संघ संरक्षक हरीश नागड़ा, इंदरचंद श्रीश्रीमाल, स्वरूपचंद सांड एवं बसंत भंडारी, वीर पिता हेमचंद भंडारी, कोषाध्यक्ष विमल राका, सचिव राजेश मेहता, पूर्व अध्यक्ष चम्पालाल भंडारी, सुरेश विनायक्या, शिखर भंडारी, संदेश भंडारी सहित संघ के अनेक वरिष्ठ सदस्य एवं समाजजन उपस्थित रहे।
आयंबिल ओली करने वाले तपस्वी
सुरेश विनायक्या, ललित विनायक्या, चंदा देवी विनायक्या, सुनंदा कोचर, दीपा विनायक्या, संपत देवी सांड, उर्मिला देवी नागड़ा, मालती नागड़ा, संगीता विनायक्या, राजश्री मेहता, मंजू रांका, शालू भंडारी, शिखा विनायक्या, डॉ. कविता अग्रवाल ने तप आराधना की।
वर्षीतप आराधकों में
संगीता भंडारी, मीनू मेहता, विराज नागड़ा, राजेश मेहता, आनंद श्रीश्रीमाल, आशीष श्रीश्रीमाल, विवेक विनायक्या, समता मेहता प्रमुख थे। प्रशस्ति पत्र का वाचन निर्मल विनायक्या ने किया।
नवपद ओलीजी आराधना का भव्य समापन, तपस्वियों का हुआ बहुमान







