-बारिश नहीं तो अधूरी उम्मीद, नहर का पानी 8 दिन दूर
अनोखा तीर, मसनगांव। कार्तिक माह शुरू होते ही मौसम ने करवट ली है। मंगलवार सुबह मौसम साफ था, दोपहर होते ही आसमान पर काले-घने बादलों का डेरा जम गया। बादल देख किसानों के मन में आस जगी, पर शाम तक बूंदें नहीं बरसीं। कम बारिश के कारण पहले से परेशान किसानों के लिए यह बादल सिर्फ उम्मीद बनकर रह गए। बिना बारिश बोवनी पर संकटक्षेत्र में रबी की तैयारी जोरों पर है। किसानों ने खेतों में पलेवा शुरू कर दिया है। जिनके पास ट्यूबवेल है वो पलेवा कर खेत तैयार कर रहे हैं, लेकिन नहर पर निर्भर हजारों किसान सूखे खेतों में पानी का इंतजार कर रहे हैं। बारिश नहीं होने से जमीन में नमी कम है, पलेवा का खर्च बढ़ रहा है। अगर बारिश हो जाती तो खेतों में नमी बनती और पलेवा व बोवनी दोनों आसान हो जाते। नहर के पानी में देरी, किसानों की चिंता बढ़ीजल संसाधन विभाग ने तवा डैम से 25 अक्टूबर को पानी छोड़ दिया है, लेकिन विभागीय लापरवाही और लंबी दूरी के कारण मसनगांव तक पानी पहुंचने में अभी करीब 8 दिन लगेंगे। यानी 1 नवंबर के बाद ही किसानों को नहर का पानी मिल पाएगा। ऊपरी से निचले क्षेत्र तक खेत बोवनी के लिए तैयार पड़े हैं, पर पानी नहीं मिलने से गेहूं-चना की बोवनी पिछड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसान समय पर बोवनी न होने से पैदावार घटने को लेकर चिंतित हैं। किसान दीपेश भायरे और सुधीर भायरे ने बताया कि इस समय हल्की बारिश भी बड़ी राहत दे सकती है। नहर में अभी समय है, बारिश से पलेवा में मदद मिलेगी। फिलहाल सबकी नजरें आसमान पर टिकी हैं, बादल तो हैं पर बरसेंगे तभी राहत मिलेगी।
आसमान में बादलों का डेरा







