-प्रादेशिक बाल साहित्यकार सम्मेलन ‘बालमन की फुलवारी संपन्न
अनोखा तीर, भोपाल। अर्चना प्रकाशन न्यास एवं मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में बाल साहित्यकारों का एक दिवसीय सम्मेलन बाल साहित्य में वैज्ञानिक दृष्टि विज्ञान भवन में आयोजित हुआ। पांच सत्रों के आयोजन में अनेक विद्वान जनों द्वारा बाल साहित्यकारों का मार्गदर्शन किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो.अनिल कोठारी महानिदेशक मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल, मुख्य अतिथि प्रियंक कानूनगो सदस्य मनवाधिकार आयोग, सानिध्य डा. विकास दवे निदेशक साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश, डॉ निवेदिता अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग मध्यप्रदेश एवं स्वागत प्रबोधन लाजपत आहूजा अध्यक्ष अर्चना प्रकाशन न्यास द्वारा किया गया। दूसरा सत्र की अध्यक्षता माधव सिंह दांगी उपाध्याय अर्चना प्रकाशन, मुख्य अतिथि गोपाल महेश्वरी संपादक देवपुत्र इंदौर, मुख्य वक्ता कैलाश जी क्षेत्र प्रचार प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किया गया। तीसरा सत्र में परिचर्चा में डॉ. भैरूलाल गर्ग, गोकुल सोनी, अनीता सक्सेना, डॉ रचना चौहान, वत्सला चौबे, अंकिता पाल, सुदर्शन व्यास, सौरभ तामेश्वरी ने परिचर्चा में भाग लिया। चतुर्थी सत्र बाल साहित्य में शोध की संभावनाएं में अध्यक्षता राकेश जैन प्रबंध न्यासी अर्चना प्रकाशन, मुख्य अतिथि डॉ अनुराधा शुक्ला शहडोल, वक्ता शांति टेम्भरे सदस्य अर्चना प्रकाशन न्यास, विषय प्रर्वतक डॉ मीनू पांडे कार्यक्रम संयोजक, निदेशक बाल साहित्य शोध सृजन पीठ, साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश, सानिध्य डॉ मालती बसंत बाल साहित्यकार, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, डॉ राम बल्लभ आचार्य वरिष्ठ बाल साहित्यकार द्वारा किया गया। समापन सत्र ज्ञान गंगा की अध्यक्षता अशोक पांडे न्यासी संरक्षक अर्चना प्रकाशन न्यास, मुख्य अतिथि डॉ.विकास दवे निदेशक साहित्य अकादमी, मुख्य वक्ता डॉ नागेश पांडे उत्तर प्रदेश, विषय प्रवर्तन साधना बलवटे निदेशक निराला सृजन पीठ द्वारा किया गया। आभार ओम प्रकाश गुप्ता निदेशक अर्चना प्रकाशन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में लेखकों की पुस्तक लेखकों के लिए पुस्तक प्रदर्शनी लगाई गई। डॉ. विकास दवे ने सम्मेलन को 40 करोड़ बच्चों की चिंता करने वाला बताया। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हमें गुगल और ए.आई पर सत्य और सटीक जानकारी डालनें को कहां जिससे बच्चों तक सही जानकारी पहुंच सके। उन्होंने बाल साहित्यकारों को भविष्य दृष्टा बताया। प्रथम सत्र में अपने सम्बोधन में प्रियंक कानूनगो ने कहां कि बच्चों के बारे लिखनें के लिए आपको बच्चा होना पड़ता हैं। उन्होंने बताया कि पंचतंत्र ऐसी पुस्तक हैं जिनको साठ देशों में साठ भाषाओं में लिख गया हैं। उन्होने कहा कि बच्चों को सत्य से परिचित करना हम सब का दायित्व हैं, उन्होंने बताया कि भाषा भारती कक्षा सातवीं की पुस्तक में राखी का मूल्य कहानी जो रानी कर्णावती और हुमायूं पर है वो पूर्णता असत्य और काल्पनिक हैं जिसका कोई प्रमाण नहीं हैं। ऐसी कल्पनाओं को पुस्तको में स्थान नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। अनिल कोठारी म.प्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद निदेशक ने कहा कि बाल साहित्यकारों को अपनी लेखनी में वेज्ञानिक दृष्टि का भी समावेश करना चाहिए, हमारी संस्कृति और भारतीय परम्परा में हर बात वेज्ञानिक आधार पर कही गई है। उन्होंने बाल साहित्यकारों कहा कि परिषद से जुड़ कर आप साहित्य की रचना करें। परिषद उन्हें कर प्रकार की सहायता प्रदान करेगा। अर्चना प्रशासन के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चे ही सबसे बड़े वेज्ञानिक होते हैं। उनकी उत्सुकता ही उन्हें सत्य का मार्ग दिखाती हैं। हम सबका दायित्व हैं कि हम उन्हें प्रमाणिक साहित्य लिखने के लिए प्रोत्साहित करें। बाल सृष्टि-भारतीय दृष्टि विषय पर आयोजित सम्मेलन में भोपाल सहित प्रदेश के अनेक स्थानों से बाल साहित्यकारों सहित वरिष्ठ साहित्यकारों ने सहभागिता की।






