अनोखा तीर, भोपाल। ड्रामची आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन की पहली रंगमंचीय प्रस्तुति चोर साहब का हिंदी अनुवाद एवं निर्देशन निधि दीवान ने किया है। विश्वविख्यात इतालवी नाटककार दारियो फो की प्रसिद्ध कृति द-विर्टनस वर्गलर पर आधारित इस नाटक के रविंद्र भवन स्थित अंजनी सभागार में दो शो प्रस्तुत किए गए। पहला शो दोपहर 2 बजे और दूसरा शो शाम 7 बजे मंचित हुआ। चोर साहब को हिंदी दर्शकों और भारतीय परिवेश के अनुरूप रूपांतरित किया गया है। इस रूपांतरण में विशेष ध्यान रखा गया कि मूल कृति की आत्मा, उसकी व्यंग्यात्मक धार और लेखक की मूल भावभूमि अक्षुण्ण रहे, ताकि दारियो फो की लेखनी का मर्म हिंदी दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। नाटक के संगीत संयोजन एवं संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी उमेश तर्कस्वार ने निभाई, जबकि प्रकाश व्यवस्था बालेंद्र सिंह ने संभाली। हास्य और व्यंग्य से भरपूर चोर साहब अपनी रोचक परिस्थितियों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, मानवीय स्वभाव और व्यवस्था के विरोधाभासों को उजागर करता है। यह प्रस्तुति दर्शकों को गुदगुदाने के साथ-साथ सोचने पर भी विवश करती है। ड्रामची आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन की इस पहली प्रस्तुति के दो मंचनों के साथ संस्था ने रंगमंच के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक यात्रा का शुभारंभ किया। विश्व रंगमंच की एक प्रतिष्ठित कृति को हिंदी दर्शकों तक पहुंचाने का यह प्रयास संस्था की रंगमंच के प्रति प्रतिबद्धता और सार्थक नाट्य प्रस्तुतियों के संकल्प को दर्शाता है।
ड्रामची आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन की पहली प्रस्तुति ‘चोर साहब के दो सफल मंचन





