अनोखा तीर, टिमरनी। शरद पूर्णिमा पर नगर की साहित्यिक संस्था सरस्वती परिवार ने काव्य निशा का आयोजन एक निजी मैरिज गार्डन में किया। जिसमें नगर सहित हरदा, रहटगांव से भी कवियों ने शिरकत की।
कवियों ने पढ़ी रचनाएं
रहटगांव से आए गीतकार कवि नारायण शर्मा ने मेरे शहर में कोई चांद आ गया, जिसकी जमाल रोशनी से दिल नहा गया… सुनाया। दूसरे दौर में उनकी गजल को जान कह कर पुकारा गया… ने गीतकार जगदीश सोलंकी की कविता बदनाम बस्ती की याद दिला दी।
हरदा से आए ग़जलकार मंसूर अली ने ये जो हसीन साल है और चांद रात है… गजल सुनाई। राष्ट्रीय स्तर पर टिमरनी की पहचान बनाने वाले मुकेश शांडिल्य ने चांदनी की चुनर को ओढ़ के, बनी बेटी तो खुशियों का खजाना भर दिया तूने… गीत सुनाया और चांद को उलाहना देते हुए कहा – बता तू अमावस की रात कहां छुप जाता है…
हरदा से आए कवि रतन सोलंकी ने श्रृंगार रस में प्रेम मंजरी फूट रही है, आशा के वृंदावन में… पढ़ा। अधिवक्ता व कवि विनोद विश्वकर्मा ने दिल लुभाती हुई, मन को भाती हुई, आ गई लो शरद पूर्णिमा… गजल पढ़ी। कवि आलोक शर्मा ने प्रेम मोहब्बत तो दिल की चीज है, जो दिल से होती है… सुनाया।
उदीयमान कवि प्रीतम तंवर ने जाके इश्क की गलियों में कह दो, दिल लगाने की फुर्सत नहीं है… पढ़ा। युवा कवि पिकेश शर्मा ने दोहे के माध्यम से व्यंग्य रचना पढ़ी। काव्य निशा के संचालक गजल व गीतकार कृष्णकांत जोशी ने कोई औलाद की खातिर, वतन तक बेच देते हैं… गजल सुनाकर खूब दाद बटोरी। उन्होंने नगर में जन्मे कवि हनुमान प्रसाद मुजुमदार को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनकी कविता तुमने मुझको क्या छू लिया, मैं आदमी ही हो गया दूसरा… की पंक्तियां सुनाईं। गीतकार हरिशंकर शर्मा ने सामाजिक-राजनीतिक चिंतन से ओतप्रोत रचना आरक्षण सुनाई और बुंदेलखंडी लोकगीत जा सावन की बलिहारें… तरन्नुम में पढ़कर श्रोताओं को आनंदित किया। काव्य निशा में अस्वस्थ होने के बावजूद संस्था के संस्थापक अध्यक्ष 86 वर्षीय ग़जलकार प्रेम सोनी प्रेम रात दो बजे तक उपस्थित रहे। अपनी बारी आने पर चार पंक्तियां सुनाकर उन्होंने अपनी कविता वसीयत पढ़ने के लिए अधिवक्ता विनोद विश्वकर्मा को अधिकृत किया। माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंहल, अध्यक्ष गुरुदेव बिल्लोरे व अतिथि कवियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। सरस्वती वंदना नारायण शर्मा ने की। संचालन कृष्णकांत जोशी ने किया और अंत में मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंहल ने सरस्वती परिवार की सराहना की।
शरद पूर्णिमा पर हुई सरस्वती परिवार की काव्य निशा

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