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Thursday, 5 November 2026
हरदा

धर्म आराधना से सराबोर हरदा का जैन समाज

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-पर्युषण पर्व में मंदिरों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, ध्यान-योग और धार्मिक आयोजनों से बढ़ा उत्साह

अनोखा तीर, हरदा। दस दिवसीय पर्युषण पर्व के चलते शहर का जैन समाज इन दिनों धर्म आराधना और आत्मसाधना में लीन नजर आ रहा है। श्री दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित पर्व के दौरान नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में प्रतिदिन भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना, अभिषेक, बृहद शांतिधारा एवं दस लक्षण मंडल विधान सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है, वहीं शाम को भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पर्युषण पर्व को लेकर जैन समाज की महिला परिषद द्वारा भी प्रतिदिन धार्मिक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। बच्चों में धार्मिक संस्कारों को बढ़ावा देने के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने धार्मिक एवं प्रेरणादायी पात्रों का स्वरूप धारण कर सहभागिता की। वहीं श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ वंदना प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। धर्म और ज्ञान को रोचक तरीके से जोडऩे के उद्देश्य से धार्मिक तंबोला प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ। इसमें प्रतिभागियों ने मनोरंजन के साथ जैन धर्म, सिद्धांतों और धार्मिक विषयों से जुड़ी जानकारी हासिल की। आयोजनों में महिलाओं और बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिल रही है।

ध्यान-योग से आत्मसाधना का संदेश

पर्युषण पर्व के दौरान कोलकाता से पधारीं अर्हम् ध्यान योग प्रशिक्षिका अनीता दीदी द्वारा श्रद्धालुओं को धर्म, ध्यान और आत्मसाधना का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में प्रतिदिन सुबह 6 से 7 बजे तक ध्यान-योग शिविर आयोजित हो रहा है। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल होकर ध्यान और योग के माध्यम से एकाग्रता एवं आत्मिक शांति का अभ्यास कर रहे हैं। अनीता दीदी द्वारा धार्मिक आयोजनों के दौरान जैन धर्म के सिद्धांतों, आत्मचिंतन, संयम और जीवन में धर्म के महत्व पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इससे पर्युषण पर्व के आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ आत्मसाधना और आत्मचिंतन का भाव भी दिखाई दे रहा है। दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि, संयम और आत्मचिंतन का महापर्व है। समाज की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि पर्व के दौरान अधिक से अधिक श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों से जुड़ें और जैन धर्म के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

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