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Friday, 6 November 2026
हरदा

लोभ और असंतोष कम होने से आती है मन की पवित्रता 

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-दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म पर हुआ प्रवचन

अनोखा तीर, हरदा। दिगंबर जैन समाज द्वारा मनाए जा रहे दस दिवसीय पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म मनाया गया। इस अवसर पर नगर के दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, संतोष और संयम का भाव धारण किया। पर्युषण पर्व के दौरान ऊं अर्हम ध्यान योग प्रशिक्षिका अनिता दीदी, कोलकाता ने उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि शौच का अर्थ केवल बाहरी स्वच्छता नहीं, बल्कि मन और आत्मा की पवित्रता है। जब मन से लोभ, असंतोष, आकांक्षा और अतृप्ति कम होती है, तब भीतर पवित्रता का भाव उत्पन्न होता है। शरीर की बाहरी स्थिति चाहे जैसी हो, लेकिन मन निर्मल हो तो व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से पवित्र रह सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तम शौच धर्म संतोष को धारण करने और सांसारिक वैभव के संग्रह की प्रवृत्ति से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। जब व्यक्ति अंतरंग से परमात्मा का अभिषेक कर धर्म को आत्मा से स्वीकार करता है, तब आत्मा को शुचिमय बनाने के लिए पुरुषार्थ करता है। ऐसे निर्मल भावों को धारण करना ही उत्तम शौच धर्म का मर्म है। जैन समाज के कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि मुनिश्री प्रणम्य सागर महाराज द्वारा बताए गए ऊं अर्हम ध्यान योग का लाभ हरदा नगर की जैन समाज द्वारा पर्युषण पर्व के दौरान लिया जा रहा है।
इन परिवारों ने अर्जित किया पुण्यलाभ
श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र हरदा मध्यप्रदेश में दशलक्षण पर्व के चौथे दिवस के विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने पुण्यार्जन किया। प्रथम अभिषेक मूलनायकश्री शांतिनाथ भगवान पावन, राहुल, रविंद्र रपरिया परिवार, प्रथम अभिषेक गर्भगृह श्रीपुष्पदंतनाथ भगवान पवन, अंकित सिंघई परिवार, प्रथम अभिषेक पाण्डुकशिला पर श्रीशांतिनाथ भगवान अभिषेक, अजीत, पारस रपरिया परिवार, प्रथम शांतिधारा श्रीपुष्पदंतनाथ भगवान इंदूबाई, विनोद, प्रमोद, नमन पहाड़े, संभाजीनगर, हेमंत, माया जैन परिवार, द्वितीय शांतिधारा श्रीपुष्पदंतनाथ भगवान पूनमचंद, अर्पित लहरी परिवार, प्रथम शांतिधारा पाण्डुकशिला पर श्रीशांतिनाथ भगवान पावन, राहुल, रविंद्र रपरिया परिवार, द्वितीय शांतिधारा पाण्डुकशिला पर श्रीशांतिनाथ भगवान स्वतंत्र, स्वदेश गंगवाल परिवार एवं भगवान 1008 श्रीपुष्पदंतनाथ जी का निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य अनुलेखा, पवन सिंघई परिवार, श्रीजी की आरती का सौभाग्य सरोज बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ।

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