-जलस्तर गिरने से बढ़ी किसानों की चिंता
-पानी की कमी से बढ़ा सिंचाई का समय
-किसान बदलने लगे फसल चक्र, जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
अनोखा तीर, मसनगांव। कम बारिश का असर अब रबी सीजन की शुरुआत में ही दिखाई देने लगा है। खेतों में पलेवा शुरू होते ही ट्यूबवेलों का पानी कम होने लगा है। कहीं जलस्तर गिरने से सिंचाई में अधिक समय लग रहा है, तो कहीं ट्यूबवेल पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं। शुरुआती दौर में ही पैदा हुए जल संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों को आशंका है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में फसलों की सिंचाई करना और मुश्किल हो सकता है। पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों ने अब फसल चक्र में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। जो किसान गेहूं और मक्का की फसल लेने की तैयारी कर रहे थे, वे अब कम पानी में तैयार होने वाली सरसों और चने की बुवाई की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करने वाले किसान भी पानी की कमी की आशंका के चलते मक्का को प्राथमिकता दे रहे हैं। छिदगांव तमोली के किसान दिनेश राठौर ने बताया कि ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल में पानी की कमी होने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मक्का की बुवाई को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि दोनों फसलों के उत्पादन का औसत संतुलित रखा जा सके। किसानों के सामने अब कम पानी में फसल तैयार करने के साथ लागत और संभावित उत्पादन का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
सूख गए नदी-नाले, तेजी से नीचे जा रहा जलस्तर
क्षेत्र के अधिकांश नदी-नालों में पानी सूख चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी-नालों में पानी रोकने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। इसके चलते बारिश का पानी ठहर नहीं पाया और जलस्तर तेजी से नीचे जाने लगा है। अक्टूबर में ही जलस्रोतों की यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। यदि अभी से पानी की कमी बनी हुई है, तो जनवरी-फरवरी में हालात और गंभीर हो सकते हैं। क्षेत्र में नहरों से भी सिंचाई होती है। नहरों में पानी चलने के दौरान नदी-नालों और आसपास के जलस्रोतों में पानी बना रहता है, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण हालात सूखे जैसे हो गए हैं। ऐसे में रबी फसलों को समय पर पानी उपलब्ध कराना किसानों के लिए चुनौती बन सकता है। पलेवा में ही ट्यूबवेलों की क्षमता प्रभावित होने से आगे की सिंचाई को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।
जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
कम बारिश के कारण अक्टूबर-नवंबर में ही जलसंकट के संकेत मिलने लगे हैं। किसानों को आशंका है कि आने वाले दिनों में सिंचाई के साथ पेयजल की समस्या भी बढ़ सकती है। मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र के लोगों ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि समय रहते जल संकट का आकलन कर किसानों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आने वाले महीनों में खेती पर पड़ने वाले संभावित असर को कम किया जा सके। किसान विजय भायरे, द्वारका दास पाटिल, राजा पटेल आदि ने बताया कि इस साल अल्प वर्षा के चलते भले ही सोयाबीन की फसल पैदा हो गई है लेकिन आगामी दिनों में पानी का संकट खड़ा हो सकता है इसलिए जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत दी जानी चाहिए।







