अनोखा तीर, मसनगांव। जन्माष्टमी के पश्चात भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी एवं डोल ग्यारस के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्राम में भगवान श्रीकृष्ण के श्रीविग्रह को लकड़ी के पारंपरिक डोल में विराजमान कर ग्राम भ्रमण कराया गया। ग्राम में डोल निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 100 वर्षों से डोल ग्यारस के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को डोल में विराजमान कर ग्राम भ्रमण कराने की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय राधा-कृष्ण मंदिर समिति द्वारा इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। डोल यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों के सामने भगवान की आरती उतारी और विधि-विधान से पूजन कर प्रसाद अर्पित किया। भजन मंडली के साथ श्रद्धालु डोल लेकर ग्राम की गलियों में निकले। भजनों और धार्मिक जयकारों से ग्राम का माहौल भक्तिमय हो गया। इसके बाद डोल को ग्राम की देदली नदी पर ले जाया गया। यहां भगवान श्रीकृष्ण का विशेष पूजन किया गया और आरती उतारी गई। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु भगवान के श्रीविग्रह को लेकर वापस ग्राम पहुंचे और राधा-कृष्ण मंदिर में विराजमान किया गया।
डोल में सवार होकर ग्राम भ्रमण पर निकले जगत के पालनहार

0 Views



