राज-काज

दिनेश निगम ‘त्यागी
‘जनसेवक की बजाय सिंधिया के ‘महाराजजैसे तेवर….!
– केंद्रीय मंत्री ज्योतिरािदत्य सिंधिया का उनके अपने संसदीय क्षेत्र गुना-शिवुपरी क्षेत्र का हाल का दौरा उनके तेवरों और अंदाज के कारण चर्चा में है। वे अक्सर कहते हैं कि मैं अब सिंधिया राजघराने का महाराज नहीं, एक जनप्रतिनिधि हूं। मैं जो भी हूं जनता की सेवा, समर्थन और अपनी मेहनत की बदौलत हूं। वे कहते हैं कि उनके नाम के आगे न श्रीमंत लिखा जाए और न ही महाराज कह कर संबोधित किया जाए। पर इस दौरे के दौरान उन्होंने जो तेवर दिखाए वे जनप्रतिनिधि की बजाय महाराज जैसे दिखाई पड़े। जनप्रतिनिधि को कई बार दौरे के दौरान जनता के विरोध का सामना करना पड़ता है। संभवत: पहली बार इस स्थिति का सामना सिंधिया को भी करना पड़ा, जब लोगों ने कहा कि उन्हें यह सड़क चाहिए। यदि सड़क न बनी तो फिर वोट की उम्मीद मत करिएगा। यह सुनते ही सिंधिया के तेवर बदल गए। वे बोले, मुझसे ऐसी भाषा में बात मत करना, सिर्फ निवेदन करो। लेकिन सामने वाला अपनी बात पर अड़ा रहा। जनप्रतिनिधि होने के नाते सिंधिया ने गुस्सा शांत करने की कोशिश नहीं की। एक किसान ने कह दिया कि ‘माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई, खाद नहीं मिल रहा है।Ó इस दौरान सिंधिया कलेक्टर और एसपी के साथ इस तरह पेश आए, तू तड़ाक में ऐसे बात की, मानो वे उनके निजी नौकर हों। सिंिधया जैसे लोकप्रिय नेता को ऐसे व्यवहार से बचना चाहिए।
भाजपा ने ही हिट कर दिया ‘छात्रों की गूंजÓ कार्यक्रम….!
– जेन-जी की मौजूदगी के लिहाज से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का इंदौर का ‘छात्रों की गूंजÓ कार्यक्रम हिट रहा। इसकी एक वजह राहुल का युवाओं के बीच बढ़ता क्रेज तो रहा ही, इससे भी बड़ी वजह खुद भाजपा रही। भाजपा और उसकी एजेंसियों ने इतने अड़ंगे लगाए कि बिना बुलाए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। पहले नेहरू स्टेडियम नहीं दिया गया। नगर निगम महापौर ने मजाकिया लहजे में कहा कि कांग्रेस कह रही है कि 50 हजार छात्र आएंगे तो उन्हें कोई बड़ा मैदान लेना चाहिए। बाद में कोर्ट की आड़ लेकर स्टेडियम नहीं दिया गया। इसके बाद रीजनल पार्क को मांगा गया तो लगभग साढ़े 10 लाख शुल्क ले लिया गया। बाद में 4 लाख और मांग लिए गए। परमिशन के साथ 31 शर्तें थोप दी गईं। शर्तों के लिए राहुल के पिता पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की हत्या तक का जिक्र कर दिया गया। अड़ंगे यहीं खत्म नहीं हुए। रातोंरात राहुल के खिलाफ इंदौर शहर में ‘झूठ की गूंजÓ लिखे पोस्टर लगा दिए गए। इतना ही नहीं, जिस दिन राहुल पहुंचे, उस दिन महिलाओं ने उन्हें काले झंडे दिखा कर विरोध किया। इस तरह भाजपा और उसकी एजेंसियों ने राहुल का इतना प्रचार कर दिया कि युवाओं की उमड़ी भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया। सामान्य सिद्धांत है, ‘क्रिया के विपरीत प्रतिक्रियाÓ होती है। राहुल के मामले में यही हो रहा है।
‘छात्रों की गूंजÓ पर ‘मिमिक्रीÓ को बड़ा दिखाने की कोशिश….!
इंदौर के हिट कार्यक्रम के दौरान एक ग्रहण लग गया। ठीक उसी तरह जिस तरह कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित द्वारा एक मंच पर राहुल गांधी के गले लग कर इटली की महिला प्रधानमंत्री का नाम लिया था। तब राहुल गांधी कुछ नहीं बोले थे लेकिन आलोचना के केंद्र में वे ही थे। इंदौर के ‘छात्रों की गूंजÓ कार्यक्रम के दौरान एक कॉमेडियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाते हुए एक ‘मिमिक्रीÓ की। इसमें एक वृद्ध महिला का भी जिक्र था,जिसके बैठने के लिए मोदी ने कुर्सी की व्यवस्था की थी। यहां भी राहुल गांधी कुछ नहीं बोले, लेिकन हंस दिए। राहुल को कहना था यह मंच ऐसी ‘मिमिक्रीÓ का नहीं। बस क्या था, यह एक ‘मिमिक्रीÓ इंदौर में उमड़ी युवाओं की भीड़ पर भारी पड़ गई। कांग्रेस ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जितनी मेहनत की थी, उस पर पानी फिर गया। विरोधियों को अवसर मिला और राहुल पर चौतरफा हमला शुरू हो गया। इसे एक मां और महिलाओं के अपमान से जोड़ दिया गया। अब राहुल के कार्यक्रम, युवाओं से उनकी बात और मुद्दों पर चर्चा की बजाय इस ‘मिमिक्रीÓ पर ज्यादा चर्चा हो रही है। यह भाजपा के मैनेजमेंट का कमाल भी है। इसका असर क्या होता है, यह अलग विषय है। राहुल के ‘छात्रों की गूंजÓ कार्यक्रम युवाओं के बीच वैसे ही हिट जा रहे थे, ऐसे में कॉमेडियन को बुलाना ‘अपने पैर में कुल्हाड़ी पटकनाÓ जैसा है?
नबीन के सामने ‘प्रथम नागरिकÓ के अपमान से फजीहत….!
– भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन का पहला मप्र दौरा पार्टी के लिए कई खट्टे-मीठे अनुभव वाला रहा। उज्जैन में प्रथम नागरिक अर्थात महापौर मुकेश टटवाल ही अपमानित हो गए। टटवाल को उस रथ से उतार दिया गया, जिसमें नबीन के साथ मुख्यमंत्री डॉ  मोहन यादव, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल आदि के साथ वे भी सवार हो गए थे। इससे महापौर अपमानित हुए ही, पूरा बैरवा समाज आहत हो गया। विरोध में समाज ने तत्काल बैठक तक कर डाली और विरोध में धरना देने का निर्णय ले लिया। मुकेश के मुताबिक प्रथम नागरिक होने के नाते वे राष्ट्रीय अध्यक्ष की अगवानी के लिए हेलीपैड पहुंचे थे। उनका नाम सूची में था या नहीं, उन्हें नहीं मालूम, लेकिन पहले उन्हें रथ में बैठने के लिए कहा गया और बाद में उतार दिया गया। इसे लेकर उन्होंने बाबा साहेब की प्रतिमा के पास बैठकर अपमान सहने की शक्ति और जनता ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे निष्ठा से निभाने की प्रार्थना की। टटवाल समर्थकों का आरोप है कि पहले भी महापौर को पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, लोकार्पणों, भूमिपूजन समारोहों और प्रशासनिक बैठकों में दरकिनार किया जाता रहा है। इससे उज्जैन भाजपा के अंदर की कलह उजागर हो गई है।
प्रदेश के पहले दौरे में कैलाश का कद बढ़ा गए नबीन….!
– भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के प्रदेश दौरे के दौरान उज्जैन के साथ इंदौर में भी कुछ बड़े नेताओं के बीच मतभेद की झलकियां देखने-सुनने को मिलीं। कार्यक्रम के दौरान सफलता के श्रेय को लेकर नेताओं द्वारा एक-दूसरे की ली गई चुटकी चटखारों के साथ चर्चा में हैं। इसके साथ नबीन का यह दौरा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय का कद बढ़ा गया। नबीन जितना सम्मान कैलाश को देते दिखाई पड़े, उतना किसी अन्य नेता को नहीं। पहले उन्होंने कैलाश के हाथ में चोट देखी तो उसे देख कर कुशलक्षेम पूछी और पास खड़े रह कर लंबी बात की। नबीन उन्हें भाई साहब कह कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कैलाश जी राजनीति में मेरे अभिभावक हैं। समर्थक यह सोच कर ही खुश हैं कि जब तक नबीन पद पर हैं, हमारे नेता की पूछपरख अपेक्षाकृत ज्यादा रहेगी। नबीन का यह दौरा इस मायने में भी सार्थक रहा कि उनकी मौजूदगी में प्रदेश ने ‘आशीर्वाद के दीएÓ जलाने का रिकार्ड बनाया और भू- अधिकार स्वामित्व योजना की ऐतिहासिक शुरुआत हुई। यह बात अलग है कि पटवारियों के विरोध के कारण योजना के क्रियान्वयन में रुकावट है। टारगेट पूरा करना तो दूर, रिजस्ट्रियां होने का काम लगभग ठप है। जिलों से विवाद की खबरें भी आने लगी हैं।

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