नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण

-दो दिवसीय शताब्दी समारोह आज से
अनोखा तीर हरदा। नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दो दिवसीय शताब्दी समारोह की शुरुआत आज से होगी। इस दौरान धर्मशाला की नींव रखने वाले समाज के वरिष्ठ पुरोधाओं की स्मृतियों को नमन किया जाएगा। नार्मदीय ब्राह्मण समाज मंदिर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी अशोक पाराशर ने बताया कि 100 वर्ष पूर्व गुलाम भारत में सामाजिक एकता और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के उद्देश्य से 13 संस्थापक सदस्यों ने 400 रुपये में 0.51 डिसमिल जमीन ली थी। स्व. गंगाविशन सदाशिव गुहा द्वारा बेहद कम शुल्क लेकर जमीन समाज को सौंपी गई और समाज के महानुभावों ने धर्मशाला की नींव रखी।  दो दिवसीय आयोजन के अंतर्गत मंगलवार को सुबह नर्मदा जल कलश पूजन होगा, इसके बाद नर्मदाष्टक, सत्यनारायण कथा, सुंदरकांड पाठ होगा। सुबह 11 से 1 बजे तक मातृशक्ति उत्सव, दोपहर 2 से 4 बजे तक संस्कार एवं सांस्कृतिक मंथन कार्यक्रम होंगे।
सन 1921 के सम्मेलन में धर्मशाला स्थापना का हुआ था विचार
समाज के वयोवृद्ध मधुकर बिल्लौरे के अनुसार नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला जिले की सबसे पुरानी धर्मशाला है। वर्ष 1921 में सेठ स्व. गणेशदास बलवटे के आतिथ्य में आयोजित समाज के पहले सम्मेलन में धर्मशाला निर्माण का प्रस्ताव आया था। इसके बाद 22 सितंबर 1926 को इसकी औपचारिक स्थापना हुई। शताब्दी समारोह के संयोजक संदीप पाराशर के अनुसार, स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले 13 महापुरुषों में रामेश्वरदास गार्गव, जगन्नाथजी गुहे कडोला, मुंशी दामोदर प्रसाद पाराशर, ताराचंद दीवान बंडावाला, सीताराम दीवान पानतलाई, बाबू नाथूराम बिल्लौरे तजपुरावाले, लक्ष्मीनारायण निलोबा सराफ, मुंशी लच्छीराम सवालनवीस, बाबू कुंजीलाल नांदरा, हरलाल खजांची पानतलाई, गुलाबचंद बजाज, बाबू रामकरण लाल जोशी (नागपुर) और नाथूराम धनेसर खिड़की वाले शामिल थे।
कल यह होंगे कार्यक्रम
मुख्य ट्रस्टी अशोक पाराशर ने बताया कि 23 सितंबर बुधवार को गोपीकृष्ण गार्डन में सुबह पंजीयन के बाद स्मारिका आराध्या एक अनमोल विरासत का लोकार्पण होगा। इसके बाद द्वितीय सत्र में मंथन, तृतीय सत्र में संकल्प सत्र होगा। इसके बाद सम्मान एवं समापन कार्यक्रम होगा।

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