-किसान इंदल सिंह कटारे 6 वर्षों से कर रहे फूलों की खेती, 120 मजदूरों को मिला रोजगार
अनोखा तीर, हरदा। जिले के ग्राम पिपलिया कला में इन दिनों खेतों में पीले और केसरी गेंदा फूलों की बहार है। यहां किसान इंदल सिंह कटारे ने बागवानी खेती को अपनाकर न केवल अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी मिसाल पेश की है। पिछले 6 वर्षों से लगातार गेंदा फूलों की खेती कर रहे कटारे ने इस बार 4.5 एकड़ में फूलों का रोपण किया है।
50 दिन में आने लगते हैं फूल
किसान इंदल सिंह कटारे ने बताया कि वे महाराष्ट्र से गेंदा फूलों का रोपा लाकर खेतों में लगाते हैं। रोपाई के करीब 50 दिन बाद पौधों में फूल आने लगते हैं, जबकि फसल का कुल चक्र लगभग 90 दिनों का होता है। कम समय में तैयार होने वाली इस फसल से अच्छी आमदनी की संभावना रहती है। उनकी खेती से प्रेरित होकर अब गांव के अन्य किसान भी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
फूलों की तुड़ाई से 120 मजदूरों को रोजगार
गेंदा फूलों की खेती से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। सामान्य दिनों में करीब 20 मजदूरों को डेढ़ माह तक लगातार काम मिलता है, जबकि वर्तमान में फूलों की तुड़ाई के लिए 120 मजदूर खेत में लगे हुए हैं। मजदूरों को 5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। एक मजदूर प्रतिदिन 500 से 800 रुपये तक की मजदूरी कमा रहा है। इससे खासकर महिलाओं और स्थानीय मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिल रहा है। कटारे ने बताया कि फसल को रोगों से बचाने और फूलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय-समय पर आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया जाता है।
पार्षद ने की प्रगतिशील किसान की सराहना
खेत का निरीक्षण करने पहुंचे पार्षद सुनील दुबे ने किसान इंदल सिंह कटारे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसान आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत हैं। परंपरागत खेती के साथ बागवानी और फूलों की खेती अपनाने से किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी गेंदा, गुलाब सहित विभिन्न फूलों की खेती अपनाने का आह्वान किया।
गांव में बढ़ रहा बागवानी खेती का रुझान
त्योहारों, शादियों और धार्मिक आयोजनों में गेंदा फूलों की मांग बनी रहती है। ऐसे में पिपलिया कला में फूलों की खेती किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। इंदल सिंह कटारे का प्रयास यह बता रहा है कि परंपरागत खेती के साथ नए विकल्प अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव में ही रोजगार भी उपलब्ध करा सकते हैं।






