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Saturday, 24 October 2026
हरदा

सावन में चार दिन बारिश के बाद थमा मानसून

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-खेतों की नमी घटी, सोयाबीन में बढ़ा इल्ली का प्रकोप

अनोखा तीर, मसनगांव। सावन माह की शुरुआत में क्षेत्र में चार दिन तक हुई अच्छी बारिश के बाद एक बार फिर मौसम ने करवट बदल ली है। पिछले कई दिनों से आसमान में बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन बारिश नहीं होने से खेतों में नमी लगातार कम होती जा रही है। खरीफ फसलों के लिए यह समय बढ़वार का है, ऐसे में वर्षा का रुकना किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। मसनगांव एवं आसपास के गांवों में इस वर्ष किसानों ने बड़े पैमाने पर सोयाबीन, मक्का, उड़द तथा अन्य खरीफ फसलों की बुवाई की है। शुरुआती बारिश से फसलों की स्थिति संतोषजनक थी, लेकिन लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की ऊपरी सतह सूखने लगी है। दिन में उमस और रात में हल्के बादल रहने से मौसम अनुकूल नहीं बन पा रहा है। बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। बारिश की कमी का असर अब फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। इल्ली पत्तियों को तेजी से नुकसान पहुंचा रही है, जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित हो रही है। समय रहते नियंत्रण नहीं होने पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। फसलों को बचाने के लिए किसान अपने-अपने खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं। दवाइयों, मजदूरी और स्प्रे मशीन के खर्च से खेती की लागत भी बढ़ रही है। किसान नितेश पाटिल का कहना है कि पहले बारिश की कमी और अब कीट प्रकोप के कारण खेती लगातार महंगी होती जा रही है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जहां इल्ली का प्रकोप दिखाई दे, वहां अनुशंसित कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में ही छिड़काव करें। साथ ही अनावश्यक दवाइयों के उपयोग से बचते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखें। क्षेत्र के किसानों की निगाहें अब मानसून पर टिकी हुई हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाएगी। फिलहाल किसान समय पर अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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