अनोखा तीर, हरदा। कृषि विज्ञान केंद्र, हरदा के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (पौध संरक्षण) डॉ. मुकेश बंकोलिया ने जिले के सोयाबीन उत्पादक किसानों को वर्तमान मौसम में फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इन दिनों सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्ली (डिफोलिएटर्स) का प्रकोप देखा जा रहा है। यह कीट पत्तियों को खाकर फसल की वृद्धि एवं उत्पादन को प्रभावित करते हैं। डॉ. बंकोलिया ने बताया कि नियंत्रण के लिए किसान इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा स्पिनोसैड 45 एससी 70 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा इमामेक्टिन बेन्जोएट 5 एसजी 80 से 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि दवा का छिडक़ाव पावर पंप से प्रति एकड़ 100 से 120 लीटर पानी में घोल बनाकर करें। इस दौरान यह सुनिश्चित करें कि दवा पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों ओर समान रूप से पहुंचे। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए प्रति एकड़ दो फेरोमोन ट्रैप तथा 15 से 20 बर्ड पर्चर लगाने की भी सलाह दी है। साथ ही कहा गया है कि केवल तब ही रासायनिक दवा का प्रयोग करें, जब प्रति मीटर कतार में 3 से 4 इल्ली दिखाई दें। केंद्र ने किसानों को एक ही कीटनाशक का बार-बार उपयोग नहीं करने की सलाह दी है, ताकि कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित न हो। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी या मार्गदर्शन के लिए केंद्र से संपर्क करने का आग्रह किया है
सोयाबीन में पत्ती खाने वाली इल्ली के नियंत्रण के लिए सलाह

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