Skip to content
Thursday, 22 October 2026
भोपाल

हमलावर टाइगर की ट्रेंकुलाइज करते समय ओवरडोज दवा देने से मौत…?

3 min read
Text Size:

अनोखा तीर, भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक महिला पर हमला कर मार डालने और चार अन्य ग्रामीणों को घायल करने वाले टाइगर की भी संदिग्ध मौत हो गई है। सूत्रों का कहना है कि टाइगर की मौत मेडिसिन के ओवर डोज से हुई है। जानकारों का कहना है कि ट्रेंकुलाइज  करने के बाद एंटी डोज देने में देरी हुई। कहते है कि ट्रेंकुलाइज  करने के बाद 15 मिनट के भीतर एंटी डोज था। इस बीच गुस्साए ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम पर हमला कर दिया, जिसके कारण वन विभाग की वहां से भाग खड़ी हुई।  जब पुलिस की मदद से रेस्क्यू टीम घटनास्थल पर पहुंची तब तक बहुत देर हो चुकी थी। टाइगर को मौत हो गई। यानि डॉक्टर की लापरवाही पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आमतौर पर ट्रैंकलाइज करते समय टाइगर के पिछले हिस्से को निशाना बनाया जाता है। भीषण गर्मी और गर्दन को निशाना बनाना भी सवालों के घेरे में है।
ट्रेंकुलाइज के बाद ऐसे हुई टाइगर की मौत
पूर्व फील्ड डायरेक्टर से हुई बातचीत और जानकारी के अनुसार ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने के बाद टाइगर की मौत आम तौर पर दवा की गलत खुराक (ओवरडोज), बेहोशी के दौरान सांस नली में रुकावट, अत्यधिक तनाव, या पहले से मौजूद किसी गंभीर बीमारी के कारण सदमा लगने (शॉक) से होती है। ट्रेंकुलाइजेशन एक बहुत ही संवेदनशील प्रक्रिया है। बाघों के ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान मृत्यु होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं। दवा की गलत खुराक यदि बाघ के वजन का सही अनुमान लगाए बिना बेहोशी की दवा जैसे ज़ाइलाज़िन या केटामाइन की मात्रा ज़्यादा दे दी जाती है, तो उसकी सांसें या दिल रुक सकता है।
सांस नली में रुकावट
बेहोश होने के बाद कई बार जानवर उल्टी कर देता है। यदि उल्टी के कण या लार उसकी सांस की नली में चले जाएं, तो दम घुटने से मौत हो सकती है।
अत्यधिक तनाव
रेस्क्यू ऑपरेशन या पिंजरे में कैद होने के दौरान बाघ अत्यधिक तनाव और गुस्से में होता है। ऐसे में ट्रेंकुलाइज करने पर शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है या मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है।
छिपी हुई चोटें या बीमारी
यदि बाघ को पहले से कोई गंभीर बीमारी, आंतरिक चोट (जैसे आपसी लड़ाई में लगी चोट), या संक्रमण हो, तो वह बेहोशी की दवा का असर नहीं झेल पाता। इन जोखिमों को कम करने के लिए हमेशा अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में सटीक डोज, एंटीडोट (दवा का असर खत्म करने के इंजेक्शन) की उपलब्धता, और त्वरित निगरानी की व्यवस्था रखी जाती है।
इनका कहना …
टाइगर की मौत कैसे हुई, इसके लिए पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। अभी ओवरडोज़ कहना उचित नहीं होगा।
समिता राजौरा मुख्य वन प्राणी अभिरक्षक
—————————

0 Views
What do you think?

Leave a Reply