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Thursday, 22 October 2026
हरदा

दो साल बाद भी पूरा नहीं हुआ बिरजाखेड़ी सड़क निर्माण  

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डबल फाटक पर घंटों इंतजार से लोग परेशान
अनोखा तीर, हरदा। जिले में नर्मदापुरम एवं बैतूल की ओर से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश कर खंडवा रोड तक पहुंचने में हो रही असुविधा को दूर करने के लिए रेलवे डबल फाटक से लेकर मगरधा मार्ग तक लगभग 4.50 किलोमीटर लंबी बायपास सड़क का निर्माण लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। निर्माण एजेंसियों द्वारा टिमरन नदी एवं अजनाल नदी पर पुलों का निर्माण तो कर दिया गया है। किन्तु इन पुलों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी, विशेष रूप से अजनाल नदी के पुल के आगे का बिरजा खेड़ी मार्ग लगभग 1.5 किलोमीटर सड़क पिछले दो वर्षों से पूर्ण नहीं हो पाई है। पुल के सामने की सड़क भी अभी तक अधूरी पड़ी हुई है, जिससे पूरी बायपास योजना का उद्देश्य अधूरा रह गया है। इसके परिणामस्वरूप नर्मदापुरम एवं बैतूल से आने वाले वाहनों को आज भी रेलवे डबल फाटक पार कर शहर के भीतर से होकर खंडवा रोड तक जाना पड़ रहा है, जिससे यातायात का दबाव बढ़ रहा है और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डबल फाटक पर लंबा जाम आम बात बन गई है। उक्त सड़क निर्माण के लिए कुछ किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया भी लंबित है तथा प्रस्ताव शासन स्तर पर स्वीकृति हेतु प्रेषित है, जिससे कार्य में और अधिक विलंब हो रहा है। साथ ही निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य की गति अत्यंत धीमी होने की बात भी सामने आई है, जो चिंताजनक है। उपरोक्त परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि संबंधित विभाग एवं निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य के प्रति लापरवाही बरती गई है, जिससे दो वर्षों में भी मात्र 1.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। एक ओर क्षेत्रीय विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने ने उक्त बायपास एवं सड़क निर्माण कार्य में हो रही देरी के वास्तविक कारणों की उच्च स्तरीय जांच को लेकर आयुक्त नर्मदापुरम संभाग एवं हरदा कलेक्टर को पत्र प्रेषित कर कार्य में लापरवाही और ढिलाई बरतने वाले संबंधित विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है। साथ ही लंबित भूमि अधिग्रहण एवं स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने की बात कही है। दूसरी ओर जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने भी बिरजा खेड़ी मार्ग में हो रही देरी पर भू-अर्जन कार्रवाई जल्द करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर धीमी गति के चलते 1.5 किलोमीटर सड़क के लिए भू-अर्जन प्रक्रिया अभी भी अधर में नजर आ रही है।

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