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Saturday, 7 November 2026
भोपाल

अखिल भारतीय साहित्य परिषद की वाल्मीकि जयंती पर गोष्ठी विश्व संवाद केंद्र में संपन्न

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अनोखा तीर, भोपाल। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की वाल्मीकि जयंती पर गोष्ठी विश्व संवाद केंद्र में संपन्न हुई। इसमें वाल्मीकि के रामायण के प्रसंग को उद्धृत करने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार श्रीराम माहेश्वरी, वरिष्ठ गीतकार पुरुषोत्तम तिवारी एवं वरिष्ठ गीतकार सीमा शर्मा का सानिध्य रहा। बीज वक्तव्य व संचालन सुनीता यादव ने, सरस्वती वंदना व परिषद गीत श्रद्धा यादव ने व आभार होशियार सिंह पटेल ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में श्रीराम माहेश्वरी ने राम के व्यक्तित्व को समाज के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि हमारे ग्रंथ रामायण व गीता हमें आचार-विचार एवं सही मार्गदर्शन देते हैं। वरिष्ठ गीतकार पुरुषोत्तम तिवारी साहित्यार्थी ने कहा कि राम के नाम का जप जीव का उद्धार कर देता है। उन्होंने गीत प्रस्तुत किया – मेरी आंखियां निहार रही डगर-डगर, रघुवर कब तक पधारोगे तुम हमारे नगर। भोपाल इकाई की महामंत्री सुनीता यादव ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्व मंगल की कामना करना हमें रामायण सिखाती है, वनवासी क्षेत्र में स्त्री के सम्मान से जुड़े प्रसंग रामायण में मिलते हैं, भारतीय धार्मिक परंपराओं को रामायण से सीखते हैं। जीवन के साथ वन लगा हुआ है, यदि वन नहीं है तो जीवन भी नहीं है। रामायण के संदर्भ व पात्रों पर रचना पाठ करते हुए शशि शर्मा ने लंका विजय कर आए राम, नीता श्रीवास्तव ने अनुकरणीय हैं राम, कीर्ति सिंह ने स्वर्ण मृग माया पति के लिए, उषा चतुर्वेदी ने वन जाने को नहीं सकुचाए पल में छोड़ दिया धाम, होशियार सिंह पटेल ने यह कथा है रघुनाथ की, सुधा दुबे ने मेघ गर्जन करता हुआ मेघनाथ जब आया, उमेश तिवारी ने इतनी कृपा करो राम नहीं विसरूं तुम्हें सुमारू, प्रतिभा मिश्रा वान्या ने कैकई का कलंक पर कैकई पात्र पर अपनी रचना प्रस्तुत की। डॉ. नीलू शुक्ला ने आदर्श कथा रामायण, दिनेश भदोरिया ने केवट प्रसंग पर अपने दोहे प्रस्तुत किए – गंगा के तट पर खड़े राम करें मनुहार। हरि वल्लभ शर्मा ने सवैया छंद के माध्यम से राम जन्म की रचना प्रस्तुति की। सीमा हरि शर्मा ने अपने काव्य संग्रह सुनो जानकी से समाज में फैली हुई भ्रांतियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया। शशि शाक्य ने प्रभु राम की महिमा सारे जग में न्यारी, श्रद्धा यादव ने उर्मिला प्रतीक्षा का मौन संवाद पर भावुक रचना सुनाई। सीमा अग्रवाल ने हनुमान संकट मोचन कहलाते, बिहारी लाल सोनी ने सूर्य के प्रकाश में राम, जन जन में राम रचना सुनाई। लेखक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र गट्टानी ने अपनी रचना में सुनाया – मर्यादा के, सदाचार के पाठ अमर, शेष रहे व्याख्यानों या मंदिर की दीवारों पर। वरिष्ठ गीतकार अशोक निर्मल ने राम आए ना जब तक मिलन के लिए, मुद्रिका ही बहुत है नमन के लिए सुनाया। कार्यक्रम में वरिष्ठ गीतकार मनोज जैन मधुर, श्यामा गुप्ता दर्शन, संजय दुबे सहित अनेक वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित रहे।

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