अनोखा तीर, मसनगांव। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के सरकारी दावों के बीच कृषि विभाग की मैदानी व्यवस्था खुद बदहाल है। हरदा विकासखंड में कृषि विस्तार अधिकारियों की कमी के चलते किसानों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। कृषि विस्तार अधिकारियों के तबादले होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। वर्तमान में विकासखंड में महज चार कृषि विस्तार अधिकारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में एक अधिकारी के जिम्मे औसतन 18 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी आ गई है। इतने बड़े क्षेत्र में नियमित भ्रमण कर किसानों की समस्याएं सुनना और उन्हें फसलों से जुड़ी तकनीकी सलाह देना अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है। इसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है। रबी सीजन में फसलों में रोग, कीट प्रकोप, खाद-बीज की उपलब्धता, फसल बीमा और सिंचाई संबंधी समस्याओं के समाधान में कृषि विस्तार अधिकारी की अहम भूमिका होती है। लेकिन मैदानी अमले की कमी के कारण किसानों को जरूरत के समय विभागीय मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के किसान दीपक कालीराणा, कीर्तन रायखेरे का कहना है कि जब एक अधिकारी को 18 पंचायतों का जिम्मा सौंप दिया जाएगा तो वह कितने गांवों तक पहुंच पाएगा। किसानों की समस्याएं सुनने और खेतों तक पहुंचकर फसलों का निरीक्षण करने के लिए अधिकारियों के पास पर्याप्त समय ही नहीं बचेगा।
अल्प वर्षा के बीच किसानों को नहीं मिल रहा मार्गदर्शन
इस वर्ष अल्प वर्षा के चलते क्षेत्र में पानी की भारी कमी बनी हुई है। ट्यूबवेलों का जलस्तर गिरने से किसान सिंचाई को लेकर परेशान हैं। वहीं जल संसाधन विभाग द्वारा नहरों में पानी छोड़े जाने के 10 दिन बाद भी क्षेत्र की नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को रबी सीजन की फसलों का चयन करने में भी परेशानी हो रही है। किसानों का कहना है कि ऐसे समय कृषि विभाग के अधिकारियों को गांवों में पहुंचकर खेतों की स्थिति, उपलब्ध सिंचाई संसाधनों और मौसम को देखते हुए चना, सरसों और गेहूं जैसी फसलों की बोवनी को लेकर उचित सलाह देनी चाहिए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में विभागीय अधिकारियों का नियमित दौरा नहीं हो रहा है। नतीजतन किसान अपने अनुभव और अनुमान के आधार पर ही फसलों की बोवनी करने को मजबूर हैं। गाढ़गी के किसान रविदास बिश्नोई ने बताया कि इस बार कम बारिश के कारण ट्यूबवेलों में पानी की कमी है। नहरों में भी अब तक पानी नहीं पहुंचने से रबी सीजन की बोवनी प्रभावित हो रही है। किसान चना और सरसों की बोवनी में देरी को लेकर चिंतित हैं दोनों ही कम पानी की फसल लगाने में देरी होती है तो किसानों को मजबूरी में गेहूं की फसल लगाना पड़ेगी लेकिन उसमें भी समय पर सिंचाई नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों की परिस्थितियों का आकलन कर फसल चयन और बोवनी के संबंध में सही मार्गदर्शन देना चाहिए, लेकिन विभागीय अमले की कमी के कारण किसानों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
रिक्त पदों का बोझ भी कार्यरत अधिकारियों पर
विभागीय सूत्रों के अनुसार केवल हरदा विकासखंड ही नहीं, बल्कि जिले में भी कृषि विभाग के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। नियुक्तियां नहीं होने से कार्यरत अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों तक विभागीय सेवाएं पहुंचाने पर पड़ रहा है। किसान नई तकनीक, उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती और फसल रोगों के नियंत्रण की जानकारी के लिए भी निजी दुकानदारों या अपने अनुभव पर निर्भर हैं। कई बार अधूरी जानकारी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। गणेश रांजने के स्थानांतरण के बाद विभाग ने दीपेश चंद्रवंशी को मसनगांव क्षेत्र का नया कृषि विस्तार अधिकारी नियुक्त किया है। हालांकि किसानों का कहना है कि एक अधिकारी की पदस्थापना से पूरे क्षेत्र की समस्या दूर नहीं होगी। इसके लिए विकासखंड और जिले में रिक्त पदों पर नियुक्तियां करना जरूरी है।
मैदानी अमला नहीं तो किसानों को सलाह कौन देगा?
सरकार खेती को आधुनिक बनाने, उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कृषि विभाग के पास ही पर्याप्त मैदानी अमला नहीं है। अल्प वर्षा और सिंचाई संकट के इस दौर में किसानों को फसल चयन से लेकर बोवनी और सिंचाई प्रबंधन तक तकनीकी सलाह की जरूरत है। ऐसे समय विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही है। सवाल यह है कि जब एक अधिकारी के जिम्मे अनेक पंचायतों का प्रभार होगा और गांवों में नियमित भ्रमण की व्यवस्था नहीं होगी तो किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ आखिर कैसे पहुंचेगा?
कृषि विभाग में अधिकारियों की कमी, किसानों को नहीं मिल रही सलाह




