-नवरात्र में भक्तों का लगा रहता है तांता
अनोखा तीर, रहटगांव। क्षेत्र सहित सभी जगह नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं, जिसके चलते तहसील क्षेत्र के मंदिरों में नवरात्रि में भीड़ बढ़ जाती है। नवरात्रि के पावन पर्व पर देव स्थलों का और भी महत्व बढ़ जाता है, भक्त अपनी मनोकामनाओं को लेकर देव स्थलों में पहुंचते हैं, जिसमें वनांचल की मुर्गी घाटी मंदिर भी शामिल है। यहां मां विंध्यवासिनी का काफी पुराना मंदिर है, जहां क्षेत्र भर के भक्तों के अलावा अन्य जिलों के भक्त भी यहां आकर अपनी मनोकामना को लेकर मन्नत मांगते हैं। रहटगांव तहसील से महज 15 किलोमीटर दूर ग्राम आंबा के पास यह मंदिर विगत 51 वर्ष पहले जमीन के नीचे खुदाई के दौरान मिला था। यहां सैकड़ों वर्ष पूर्व प्राचीन मूर्ति निकली थी, जिसकी स्थापना रहटगांव के पुजारी शिवगुरु सोनी द्वारा कराई गई। वहीं मुर्गी घाटी पर प्राचीन देवी का मंदिर है, जहां नवरात्रि में विशेष आयोजन होते हैं। मंदिर के पुजारी सोनी को सन् 1975 में सपने में मां विजया देवी ने दर्शन देकर कहा कि मैं उस स्थान पर ठहरी हूं, उस स्थान पर जाओ और मुझे निकालो। सुबह सोनी वहां पहुंचे और खुदाई की गई तो वहां से देवी की मूर्ति को निकाला गया और 16 अप्रैल 1978 को यहां पर प्रथम बार नवरात्रि का आयोजन किया गया। यहां पर अभी तक तीन बार भागवत पुराण का आयोजन एवं सन 1998 में विशाल यज्ञ का आयोजन भी किया जा चुका है, जिसमें लगभग 25 से 30 हजार लोगों ने यज्ञ का लाभ लिया था। यहां पर जल मुर्गी अधिक होने से मंदिर मुर्गी घाटी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। यहां पर मां विंध्यवासिनी के मंदिर के अलावा दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर, लक्ष्मी जी, काली जी, भैरव बाबा, दाजी बाबा, दाना बाबा, क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर भी स्थित हैं। विगत वर्ष सोनी के निधन के बाद यहां की व्यवस्था उनके बड़े पुत्र विजय सोनी संभाल रहे हैं।





