पटवारियों का सवाल…. भूमि अधिकार मिलने के बाद बैंक लोन दे रहे

-रजिस्ट्री हो रही फिर हमें क्यों उलझाया जा रहा ?
– स्वामित्व रजिस्ट्री के निष्पादन अधिकारी बनने को तैयार नहीं मप्र के पटवारी
-डाटा शुद्धिकरण के बिना काम करने से इनकार, कोर्ट जाने की तैयारी
अनोखा तीर, हरदा। जिला समेत पूरे मध्य प्रदेश के पटवारी किसी भी सूरत में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली रजिस्ट्री के निष्पादन अधिकारी बनने के पक्ष में नहीं हैं। अपनी इन मांगों और आपत्तियों को लेकर पटवारियों ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस पत्रकार वार्ता में मध्य प्रदेश पटवारी संघ के उप-प्रांतीय अध्यक्ष राजीव जैन, जिलाध्यक्ष विकास जोशी, जिला सचिव सुनील शर्मा, तहसील अध्यक्ष संतोष गौर और फूलसिंह उईके समेत बड़ी संख्या में पटवारी मौजूद रहे। पटवारियों ने साफ किया कि जब तक स्वामित्व योजना के तहत तैयार खसरा-खतौनी के डाटा का पूरी तरह शुद्धिकरण नहीं हो जाता, वे रजिस्ट्री निष्पादन अधिकारी का काम नहीं करेंगे। पटवारियों ने अपने इस विरोध के पक्ष में कई गंभीर कानूनी, व्यावहारिक और तकनीकी तर्क दिए हैं। उनके अनुसार यह योजना मूल रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की है, न कि राजस्व विभाग की। राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में यह काम पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक से कराया जा रहा है। योजना के पहले चरण में समग्र आईडी से डाटा फेच करने के कारण कई अभिलेखीय और नाम संबंधी त्रुटियां हुई हैं। इन्हीं खामियों के चलते पूर्व में सागर जिले के ही एक पटवारी साथी को एकमात्र आरोपी बनाकर एफआईआर दर्ज कर दी गई थी, जिससे उसे अब तक न्यायालयीन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  पटवारियों ने बताया कि वर्तमान में स्वामित्व योजना के तहत हितग्राहियों को भू-स्वामी का हक पहले ही मिल चुका है और उसके आधार पर बैंक लोन भी प्रदान किया जा चुका है, इसलिए इस प्रक्रिया से हितग्राहियों को कोई नया लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, साइबर तहसील 1.0 एवं 2.0 के नियमानुसार नामांतरण प्रकरणों के निस्तारण में निष्पादन अधिकारी वही हो सकता है जो राजस्व अभिलेख में दर्ज भूमि का धारक हो। इसके अलावा वर्तमान स्वामित्व रिकॉर्ड के अनुसार क्रेता का नाम पहले से ही दर्ज है, जिससे यह पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया सारहीन हो जाती है। इसके बाद भी हम लोगों पर दबाव बनाकर काम कराया जाता है तो रजिस्ट्री के बाद पुरानी गलतियों का सुधार राजस्व न्यायालयों से न होकर सिविल कोर्ट (व्यवहार न्यायालय) से होगा, जिससे पटवारियों को व्यक्तिगत पक्षकार बनाया जाएगा। किसानों को भी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटकर व्यक्तिगत परेशानी झेलनी पड़ेगी।
-पटवारियों का यह भी कहना है कि प्रोबेशन पीरियड पर चल रहे उनके नए साथियों पर दबाव बनाकर जबरन रजिस्ट्री कराने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है। हमारा शासकीय कार्य का विरोध नहीं ना ही जिले के अधिकारियों से कोई विरोध है। हम केवल गलत कार्य का विरोध कर रहे हैं यदि हमारे साथियों का नुक़सान करने का प्रयास किया गया तो मजबूरन हमें उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी समस्त जबावदारी प्रशासन की रहेगी।
स्वामित्व योजना संशय व सम्भावित उत्तर

आप इस योजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?
क्योंकि यह योजना विरोधाभासी है और पूर्व से प्रचलित पंजीकरण/पंजीयन अधिनियम और भू-राजस्व संहिता की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करती है। इस योजना की कोई आवश्यकता ही नहीं है समस्त आबादी अधिकार अभिलेख अभी भी कब्जेदार के नाम पर भूमिस्वामी मद में दर्ज है। व्यवहारिक व विधिक रूप से भविष्य में प्रत्येक पटवारी को कोर्ट कचहरी के नियमित चक्कर काटने पड़ेंगे।
सरकार यदि किसी काम को दे रही है तो, आपको करना चाहिए?
हमने आज तक दिए गए सभी कार्यो को निष्ठा से किया है, जिसके परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश भू-अभिलेख व राजस्व तथा अन्य विभाग की योजना जिसमें पटवारी सम्मिलित रहा हो देश मे अग्रणी व पुरुस्कृत रहा है। इतिहास गवाह है कोई समस्या नहीं होने पर पटवारी कभी विरोध नही करते।
आपके अधिकारी आपको आदेशित करें वो मानना चाहिए, आप खुद कैसे तय कर सकते हैं कि, कौनसा काम करना है, कौनसा नहीं?
अधिकारियों के द्वारा दिये गए हर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष समस्त आदेश पटवारी मानता है, यकीनन हो तो आप स्वयं अधिकारियों से पूछ लें और इस योजना से तो अधिकारी भी पहले दिन से विरत हैं।
जब सर्कुलर है सरकार का तो कानूनी अड़चन कैसी?
यदि कल त्रुटिवश कोई गलत सर्कुलर निकल जाए जिसमें किसी किसान या ग्रामीण का हित प्रभावित हो रहा हो तो वो जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं यानी हम, हमारा दायित्व है उनको भी उस सर्कुलर की कमियां और तकनीकी व्यवधानों के बारे में बताना। यदि सब सही होता तो इतने संशोधन नहीं होते और शासन स्वयम बुलाकर नहीं पूछती क्या दिक्कत है।
आप काम को कब करना स्वीकार करेंगे, ऐसी कौनसी गाइडलाइन बनाई जाए?
यह पंचायत राज विकास विभाग का कार्य है जो कि उन्ही के द्वारा किया जाना चाहिए, यदि उसमें कोई भी तकनीकी अथवा साधनों का सहयोग लगेगा तो हम तत्पर हैं। जब हमारे विभाग का काम आज तक किसी ने नहीं किया तो हमसे दूसरे विभाग का काम क्यों करवाया जा रहा है जो कि तकनीकी, विधिक व व्यवहारिक रूप से अमान्य है और जिनके पास उनके सहयोगी मिलाकर हमसे बड़ा अमला है।
आप हितग्राहियों का हक छीन रहे हैं, उनको कर्ज आदि सुविधाएं मिलने से रोक रहे हैं?
यह दुष्प्रचार है, हम किसी ग्रामीणजन का हक नहीं छीन रहे, जो भूमि/मकान पूर्व से उन्ही के नाम पर है यदि यह योजना लागू नहीं भी होगी तो भी उसी के नाम पर रहेगी। और वह इस कब्जे को नियमित रूप से संहिता के प्रावधानुसार क्रय-विक्रय, फौती के कार्य कर पा रहा है और उसे सुगमता और सरलता से बैंक से लोन भी मिल रहा है। कहीं पर किसी का कोई हक प्रभावित नहीं हो रहा।
निष्पादक की जिम्मेदारी किसे दी जानी चाहिए?
हम बहुत छोटे कर्मचारी हैं। यह तय करने वाले, हम सिर्फ यही निवेदन करेंगे कि यह योजना जिस विभाग की है उन्ही से करवाना चहिए। हम आंखों देखी मक्खी नही निगल सकते। जो कार्य अमान्य है, त्रुटिपूर्ण है, जिसकी विधिक और तकनीकी संमस्याएँ निरुत्तर रही हैं और अन्य विभाग का  हम नहीं करना चाहते।

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