अनोखा तीर, हंडिया। नर्मदा के पावन तट पर पितृ पक्ष के लिए धार्मिक परंपरा में पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तर्पण का विशेष महत्व माना गया है, नर्मदा नदी के पवित्र तट पर विधि-विधान से तर्पण करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। हंडिया के प्रसिद्ध रिद्धेश्वर नर्मदा तट पर पिछले 16 सालों से पंडित रामकृष्ण दाधीच सभी श्रद्धालुओं के पूर्वजों का स्मरण करते हुए नर्मदा जल अर्पित कर उनकी नि:शुल्क शांति की कामना करते आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नर्मदा तट पर तर्पण करने से पितरों को शांति और संतुष्टि प्राप्त होती है। पं. दाधीच के अनुसार श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण से पितृ दोष से मुक्ति की धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि तर्पण से प्रसन्न होकर पितर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे परिवार में सुख-शांति, संतान सुख, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है। विशेष अवसरों, अमावस्या तथा पितृ पक्ष के दौरान नर्मदा तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण एवं पूजन करते हैं। धार्मिक दृष्टि से तर्पण केवल एक कर्मकांड नहीं बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा भी माना जाता है।
नर्मदा के पवित्र जल में तर्पण से पितरों का स्मरण, सुख-समृद्धि की मान्यता

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