टोकन बुक करने में किसानों को नहीं मिल रहा यूरिया

-डीएपी की जगह एनपीके और टीएसपी बता रहा ऑनलाइन सिस्टम

अनोखा तीर, मसनगांव। रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को खाद की व्यवस्था को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों के माध्यम से खाद लेने के लिए ऑनलाइन टोकन बुक करने की प्रक्रिया में किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद का विकल्प नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि यूरिया और डीएपी की मांग अधिक होने के बावजूद ऑनलाइन सिस्टम में इनकी उपलब्धता नहीं दिखाई दे रही, जबकि इनके स्थान पर एनपीके और टीएसपी के विकल्प दिखाई दे रहे हैं। ग्राम के किसान भागीरथ भायरे और गांगला के राजकुमार सेन ने बताया कि बाजार में खाद उपलब्ध होने के बावजूद ऑनलाइन व्यवस्था में यूरिया और डीएपी की कमी दिखाई जा रही है। किसानों की प्रमुख मांग डीएपी और यूरिया की रहती है, लेकिन टोकन बुकिंग के दौरान इनका विकल्प नहीं मिलने से परेशानी बढ़ रही है। किसान कैलाश नामदेव ने बताया कि डीएपी की मांग करने पर ऑनलाइन सिस्टम में उसकी जगह एनपीके और टीएसपी के विकल्प दिखाई दे रहे हैं।
जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिलने से बढ़ी चिंता
किसानों के अनुसार रबी सीजन में गेहूं सहित अन्य फसलों की बोवनी का समय नजदीक आने के साथ खाद की जरूरत बढ़ रही है। किसान अपनी जमीन और फसल की आवश्यकता के अनुसार डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरक लेना चाहते हैं, लेकिन ऑनलाइन टोकन व्यवस्था में अलग-अलग विकल्प दिखाई देने से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तविक रूप से कौन-सी खाद उपलब्ध है। किसानों का कहना है कि समय पर पसंदीदा खाद नहीं मिली तो बोवनी और फसल की शुरुआती तैयारी प्रभावित हो सकती है।
15 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा खाद लेने
किसानों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में खाद की बिक्री की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें डीएमओ और निजी दुकानों तक जाने के लिए करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे किसानों का समय और डीजल दोनों खर्च हो रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि सहकारी समितियों में नगद बिक्री के लिए काउंटर शुरू किए जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में ही किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध हो सके। किसानों ने संबंधित विभाग से ऑनलाइन टोकन व्यवस्था में खाद की वास्तविक उपलब्धता स्पष्ट करने तथा रबी सीजन के लिए डीएपी, यूरिया और पोटाश सहित आवश्यक खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
कीमतों में काफी अंतर
रबी सीजन के लिए जो उर्वरक शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है, उनकी कीमतों में काफी अंतर बना हुआ है। जहां डीएपी की कीमत 1350 रुपए है, वहीं एनपीके की कीमत 1650 रुपए से लेकर 2450 रुपए तक बताई जा रही है, जिससे किसानों को फसल की बुवाई में ही हजारों रुपए अधिक लग रहे हैं। किसान चाहते हैं कि खेती की लागत कम हो और उत्पादन अधिक बढ़े, इसके लिए डीएपी, यूरिया के साथ पोटाश, जिंक सल्फेट, मैग्नीशियम, बोरान आदि की मांग बनी हुई है।

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