खुशियों की दास्तां

-असिस्टेंट से एंटरप्रेन्योर बने टिमरनी के अर्पित
-बांस शिल्प को दिलाई नई पहचान, मुख्यमंत्री ने भी थपथपाई पीठ

अनोखा तीर, हरदा। जब हुनर को सही तकनीक और बाजार की समझ मिल जाए, तो वह न सिर्फ एक व्यक्ति की तकदीर बदलता है बल्कि पूरे समाज के लिए रोजगार के नए द्वार खोल देता है। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है हरदा जिले के टिमरनी निवासी अर्पित बछौतिया ने, जो आज क्षेत्र के युवाओं और पारंपरिक शिल्पकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।
प्रोजेक्ट असिस्टेंट से शुरू हुआ सफर
अर्पित ने टिमरनी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से स्थापित ‘बांसकारी टेक्नोलॉजी कम कॉमन फैसिलिटी सेंटरÓ में एक प्रोजेक्ट असिस्टेंट के रूप में अपने सफर की शुरुआत की थी। काम के दौरान अर्पित ने महसूस किया कि स्थानीय शिल्पकारों के पास हुनर की तो कोई कमी नहीं है और वे बेहतरीन उत्पाद भी बनाते हैं, लेकिन सही मार्केटिंग और उचित बाजार न मिलने के कारण उन्हें अपनी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता। इस समस्या को दूर करने के लिए अर्पित ने खुद केंद्र के माध्यम से बांस के वैज्ञानिक उपचार, आधुनिक डिजाइनिंग, फिनिशिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग के गुर सीखे। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने स्वयं को एक मार्केटिंग लीडर के रूप में स्थापित किया और स्थानीय शिल्पकारों को राज्य स्तरीय मेलों, सरकारी कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और बड़े खरीदारों से सीधे जोड़ना शुरू कर दिया। उनके इस प्रयास की बदौलत आज टिमरनी के शिल्पकारों द्वारा बनाए गए डिजाइनर बास्केट, लैपटॉप स्टैंड, पेन स्टैंड, प्लांटर और पर्यावरण के अनुकूल अन्य बांस उत्पाद देश भर के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने की सराहना, मिली बड़ी कामयाबी
वर्ष 2026 में हरदा में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि आधारित कौशल विकास सम्मेलन में जब अर्पित के मार्गदर्शन में तैयार बांस उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनके कार्यों और इस अनूठी पहल की सराहना की। वर्तमान में अर्पित खुद एक सफल बांस उद्यमी बन चुके हैं और इस क्षेत्र से सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं। अर्पित की यह सफलता इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि यदि पारंपरिक कौशल को विज्ञान, तकनीक और प्रभावी मार्केटिंग से जोड़ दिया जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में भी हरित उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं। अर्पित आज न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि दर्जनों शिल्पकारों को बाजार उपलब्ध कराकर उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं।
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