अनोखा तीर, हरदा। मध्य प्रदेश लेखक संघ जिला इकाई हरदा द्वारा नियमित मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित किया गया। सरस्वती वंदना रतन सिंह सोलंकी द्वारा प्रस्तुत की गई। कविताओं के दौर का प्रारंभ मंसूर अली की ग़ज़ल रंजो-गम का बोझ उठाया करता हूं से हुआ, जिसने गोष्ठी में समां बांधा। सावन सिटोके द्वारा टूटे-फूटे मकान देख लो, खाली खेत खलिहान देख लो… हरसूद के अतीत को लेकर कविता का वाचन किया गया। रतन सिंह सोलंकी ने पर्यावरण को लेकर भविष्य निधि यह है किसान की जीवन भर सुख पाएगा, मेड़ पर जाकर जब अपने वह सागौन लगाएगा कविता प्रस्तुत की। त्रिलोक शर्मा द्वारा ग्रामीण जीवन पर याद आता गांव मेरा इस नगर की भीड़ में, इसीलिए मन करता मेरा लौटूं अपने नीड़ में गीत सुनाया। गोष्ठी में कवि नरेंद्र वर्मा, जी आर गौर, अतहर हुसैन ने अपनी प्रतिनिधि कविताओं का वाचन कर खूब तालियां बटोरीं। गौरीशंकर मुकाती ने अपना एक चर्चित गीत एवं प्रभुशंकर शुक्ला ने उठ-उठ चाकी पीस जगाए चिरैया, पाती भेज-भेज हारी आए ना भैया गीत सुनाया। लेखक संघ के वर्तमान अध्यक्ष सुभाष सिटोके की अनुपस्थिति में गोष्ठियों एवं कार्यक्रमों के संचालन हेतु मंसूर अली को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि संघ का स्थापना दिवस 13 दिसंबर दिन रविवार को रुपई एग्रो में मनाया जाएगा, इस आशय की जानकारी संघ के उपाध्यक्ष सावन सिटोके ने दी। लेखक संघ के कवियों की सर्वश्रेष्ठ कविताओं एवं हरदा जिले के समस्त साहित्यकारों की कविताओं का एक साझा संकलन निकालने का भी प्रस्ताव पारित किया गया।
मप्र, लेखक संघ जिला इकाई का वार्षिक स्थापना समारोह 13 दिसंबर को

0 Views



