गायत्री शक्तिपीठ में ‘हमारे गुरुदेव कार्यक्रम आयोजित

– गुरुदेव के व्यक्तित्व, कृतित्व और सत्साहित्य पर हुआ विचार-मंथन

अनोखा तीर, हरदा। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के दिव्य मार्गदर्शन तथा परम वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष के अंतर्गत गुरुदेव की परिकल्पना मनुष्य में देवत्व का उदय तथा धरती पर स्वर्ग का अवतरण को साकार करने के उद्देश्य से उनके सत्साहित्य, कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विचार-मंथन के लिए हमारे गुरुदेव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गायत्री शक्तिपीठ हरदा एवं स्वर्णिम उदय वेद संस्कृति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय हरदा डॉ. प्रभुशंकर शुक्ल, विशेष अतिथि पर्यावरणविद् एवं साहित्यकार गौरीशंकर मुकाती, स्वर्णिम उदय वेद संस्कृति फाउंडेशन हरदा के अध्यक्ष शरद कुमार अग्रवाल तथा समाजसेवी घनश्याम दास सोमानी उपस्थित रहे। प्रमुख वक्ता के रूप में एकलव्य विश्वविद्यालय दमोह की डॉ. उषा खंडेलवाल एवं पर्यावरणविद् तथा स्वावलंबन विशेषज्ञ नागपुर की डॉ. भाग्यश्री भकने ने विचार व्यक्त किए। गोमय उत्पाद विशेषज्ञ जितेंद्र कुमार भकने भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला समन्वयक गायत्री परिवार हरदा प्रेमनारायण गौर ने की। मुख्य ट्रस्टी गायत्री शक्तिपीठ हरदा ऋषि कुमार पारे की उपस्थिति में देव पूजन, दीप प्रज्वलन, गुरु वंदना एवं गायत्री मंत्र के सस्वर पाठ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर सभी अतिथियों का गोमय उत्पाद एवं सत्साहित्य तथा सत्संकल्प प्रदान कर अभिनंदन किया गया।
गुरुदेव के जीवन और कृतित्व पर व्याख्यान
कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता डॉ. उषा खंडेलवाल ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन चरित्र, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गुरुदेव के साथ कार्य करते हुए अपने जीवन के महत्वपूर्ण संस्मरण भी साझा किए। गायत्री मंत्र एवं गुरुदेव के सत्साहित्य पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र को साधना के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों के विकास का माध्यम माना गया है। उन्होंने युवाओं एवं समाज को गुरुदेव के साहित्य को पढ़ने और उनके विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। डॉ. भाग्यश्री भकने ने परम वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा के जीवन एवं कार्यों पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने गाय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गो-आधारित उत्पादों के निर्माण, स्वावलंबन एवं उनके उपयोग के लिए प्रेरित किया। जितेंद्र कुमार भकने ने गो-उत्पाद विशेषज्ञ के रूप में गाय के गोबर एवं गोमूत्र से संबंधित पारंपरिक उपयोगों एवं उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने सनातन संस्कृति एवं वेदों में गाय के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
गायत्री मंत्र और संस्कारों पर दिया जोर
मुख्य अतिथि डॉ. प्रभुशंकर शुक्ल ने अपने संबोधन में गायत्री मंत्र के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र की साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कृति एवं संस्कारों का समागम कर सकता है। समाजसेवी घनश्याम दास सोमानी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्य ट्रस्टी ऋषि कुमार पारे ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का परिचय कराया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया। आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुखराम चौधरी ने गोपालन के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। अध्यक्षीय उद्बोधन में जिला समन्वयक गायत्री परिवार हरदा प्रेमनारायण गौर ने गायत्री मंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, अध्यापन, पत्रकारिता, पर्यावरण संरक्षण, सृष्टि सृजन एवं उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान किया गया। गुरु वंदना गायत्री परिजन श्रीमती कुसुम गौर एवं श्रीमती साधना गौर द्वारा प्रस्तुत की गई। वहीं प्रज्ञा गीत एवं स्वागत गीत स्वर्णिम उदय किड्स स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गायत्री परिजन एवं नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ से श्रीमती शोभा काशिव, श्रीमती कमला सोनी, श्रीमती प्रज्ञा अग्रवाल, श्रीमती कुसुम गौर, श्रीमती साधना गौर, श्रीमती सरिता मालवीय, श्रीमती लता मालवीय, श्रीमती सुनीता अग्रवाल, श्रीमती मधु पारे, श्रीमती मृदुला पटेल, पूजा राठौर, शैलेंद्र पाराशर, दिलीप गौर, ग्यारसराम गौर, संतोष मालवीय, लक्ष्मीनारायण चौहान, चंद्रशेखर टिकारिया, ओमप्रकाश राजपूत, नन्हेंलाल चौधरी, अभिलाष गौर, मनीष गौर, राकेश मालवीय, कांता प्रसाद, भारद्वाज, स्मृति भारद्वाज, रितु गुर्जर, नेहा शर्मा, शिवम मालवीय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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