-शासकीय महाविद्यालय टिमरनी में जन अभियान परिषद ने आयोजित की संगोष्ठी
अनोखा तीर, टिमरनी। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के उपलक्ष्य में शासकीय महाविद्यालय टिमरनी में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके योगदान, एकात्म मानव दर्शन तथा अंत्योदय की अवधारणा पर वक्ताओं ने विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता एवं पूर्व विधायक प्रतिनिधि तथा पार्षद सुनील दुबे ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों के स्वागत के पश्चात संगोष्ठी के उद्देश्य एवं विषय की भूमिका प्रस्तुत की गई। संगोष्ठी में ब्लॉक समन्वयक अनुपम भारद्वाज ने पं. उपाध्याय के प्रारंभिक जीवन, शिक्षा-दीक्षा, व्यक्तित्व एवं विचारों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उनके जीवन संघर्ष और राष्ट्र सेवा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, संगठन, राष्ट्रभक्ति और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा। इसके पश्चात राष्ट्रीय कवि एवं परामर्शदाता मुकेश शांडिल्य ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने दीनदयाल जी द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए कार्यों तथा उनके द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रों के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के समक्ष रखे गए विचारों की जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी ने पत्रकारिता को केवल समाचार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र एवं समाज के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रभावी साधन माना। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता सुनील दुबे ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव, उनके सामाजिक एवं राष्ट्रीय चिंतन तथा एकात्म मानव दर्शन की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी का चिंतन भारतीय संस्कृति और समाज की मूल भावना से जुड़ा हुआ था। उनका मानना था कि विकास का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सुविधाओं और अवसरों का लाभ पहुंचाना होना चाहिए। श्री दुबे ने अंत्योदय की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बेहतर बनाना ही विकास की सार्थकता है। उन्होंने वर्तमान में संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को बताया कि किस प्रकार शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे स्वयं जागरूक बनें तथा अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों को भी शासकीय योजनाओं की जानकारी देकर उनका लाभ दिलाने में सहयोग करें। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और विचारों को केवल पढ़ने तक सीमित न रखते हुए उनके सामाजिक सरोकारों को समझने तथा राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में मुकेश शांडिल्य ने सभी अतिथियों, महाविद्यालय परिवार एवं उपस्थित छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में परामर्शदाता प्रवीण चौरसिया, शांति कौशल, नवांकुर संस्था प्रभारी दीपांशु राठौर, अमित महोले, बृजेश तिवारी, वेद प्रकाश दीक्षित, शुभम सोलंकी, नंदिनी साहिब, सलोनी, राधिका, पूर्णिमा, संतोषी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों को पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, राष्ट्र चिंतन, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के सिद्धांतों को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, राष्ट्र सेवा और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।





