– पितरों के निमित्त रखे भोजन को ग्रहण करने वाला कौआ नहीं मिल रहा, पर्यावरण संतुलन पर भी बढ़ी चिंता
अनोखा तीर, मसनगांव।श्राद्धपक्ष शुरू होते ही घर-घर में पितरों के निमित्त भोजन तैयार कर श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार भोजन का एक हिस्सा कौए के लिए घर के बाहर रखा जाता है। मान्यता है कि कौए के माध्यम से पितरों तक भोजन पहुंचता है। लेकिन बदलते समय के साथ अंचल से कौए ही लगभग गायब होते जा रहे हैं। ऐसे में पितरों के निमित्त रखा गया भोजन ग्रहण कराने के लिए लोगों को कौए की तलाश करनी पड़ रही है।
कुछ वर्ष पहले तक सुबह कौओं की कांव-कांव से गूंजते थे गांव
ग्रामीण बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तक गांवों में सुबह होते ही पेड़ों, घरों की छतों और खेतों के आसपास कौओं की कांव-कांव सुनाई देती थी। घरों से निकलने वाले भोजन के अवशेष भी कौए आसानी से ग्रहण कर लेते थे। श्राद्ध पक्ष में तो कौओं के लिए भोजन रखना सामान्य बात थी। अब हालात बदल गए हैं। कई जगह पूरे दिन तलाश करने के बाद भी कौआ नजर नहीं आता।
गिद्धों का झुंड भी अब दिखाई नहीं देता
कौओं के साथ अंचल से गिद्धों की संख्या में भी भारी कमी आई है। कभी गांवों के आसपास मृत पशुओं के पहुंचते ही आसमान में गिद्धों के झुंड दिखाई देते थे। गिद्ध मृत पशुओं को खाकर प्राकृतिक रूप से सफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। अब मृत पशुओं के आसपास भी गिद्ध दिखाई देना दुर्लभ हो गया है।
बदलते पर्यावरण को लेकर ग्रामीण चिंतित
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में खेतों में रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल, प्राकृतिक आवास में बदलाव और अन्य पर्यावरणीय कारणों से पक्षियों की संख्या प्रभावित हुई है। मोबाइल टावरों को भी ग्रामीण इन पक्षियों की कमी से जोड़कर देखते हैं, हालांकि इसके पीछे वास्तविक कारणों की पुष्टि विशेषज्ञ अध्ययन से ही हो सकती है।
परंपरा के साथ प्रकृति का संतुलन भी जुड़ा
श्राद्ध पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा अब ग्रामीणों को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के नजरिए से भी सोचने को मजबूर कर रही है। कभी गांवों की पहचान रहे कौए और पर्यावरण के सफाईकर्मी माने जाने वाले गिद्ध यदि इसी तरह कम होते रहे तो आने वाली पीढ़ियां इन पक्षियों को केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि पक्षियों के संरक्षण और प्राकृतिक वातावरण को बचाने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है।





