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Monday, 26 October 2026
हरदा

जीपी मॉल की पार्किंग वसूली को लेकर महिला ने उठाई आवाज

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-१ लाख ३५ हजार रुपए मांगा हर्जाना, मॉल प्रबंधन ने बताया अत्यधिक
-उपभोक्ता फोरम पहुंचा मामला
अनोखा तीर, हरदा। शहर के बस स्टैंड रोड स्थित जीपी (गणपत पन्नालाल) मॉल में पार्किंग शुल्क वसूले जाने का मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग पहुंच गया है। हरदा निवासी अदिति दुबे द्वारा मॉल प्रबंधन के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत परिवाद प्रस्तुत किया गया है, जिसमें पार्किंग शुल्क की वसूली को अनुचित बताते हुए विभिन्न मदों में कुल 1 लाख 35 हजार 110 रुपये की राहत एवं प्रतिकर की मांग की गई है।
10 रुपये की वसूली से शुरू हुआ विवाद
परिवाद के अनुसार, आवेदिका 21 मई 2026 को जीपी मॉल में खरीदारी करने पहुंची थीं। उनका आरोप है कि खरीदारी के बाद वाहन पार्किंग के नाम पर उनसे 10 रुपये वसूले गए। परिवाद में मॉल परिसर में पार्किंग शुल्क वसूली बंद करने और पार्किंग सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता की ओर से मामले में कथित रूप से वसूले गए 10 रुपये वापस करने के साथ ही हर्जाना, सूचना पत्र का खर्च, मानसिक परेशानी एवं वाद व्यय सहित कुल 1.35 लाख रुपए से अधिक की राशि की मांग की गई है।
मॉल प्रबंधन ने पेश किया लिखित जवाब
इधर, मामले में जीपी मॉल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जिला उपभोक्ता आयोग में लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया है। जवाब में मॉल प्रबंधन ने परिवाद पर प्रारंभिक आपत्तियां दर्ज कराते हुए शिकायत को वर्तमान स्वरूप में विचारणीय नहीं बताया है। मॉल प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने 10 रुपये के विवादित सुविधा शुल्क के मामले में 1,35,110 रुपये का दावा किया है, जो अत्यधिक और असंगत है। लिखित जवाब में परिवाद को निरर्थक और परेशान करने वाला बताते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अनुकरणीय लागत लगाए जाने की मांग भी की गई है।
अब आयोग करेगा मामले की सुनवाई
मामले में एक ओर शिकायतकर्ता ने पार्किंग शुल्क वसूली को चुनौती देते हुए मुआवजे और पार्किंग व्यवस्था में बदलाव की मांग की है, वहीं दूसरी ओर मॉल प्रबंधन ने अपने जवाब में शिकायत के दावे और राशि पर आपत्ति जताई है। अब दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों के आधार पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अंतिम निर्णय आयोग के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

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