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Sunday, 11 October 2026
हरदा

दो दशक से सक्रिय नेक्सेस को नहीं तोड़ पाए वन बल प्रमुख, डीएफओ फिर जोड़ रहे हैं मनमानी शर्ते

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–उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई शर्ते डस्टबिन में

गणेश पांडे, भोपाल। दो दशकों से जंगल महकमें में बने सीएफ-डीएफओ और सप्लायर्स नेक्सस को तोड़ने में वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का नेक-नियति प्रयास भी असफल नजर आ रहैं है। वन बल प्रमुख के निर्देश पर तैयार निविदा की एकजाई शर्तें को दरकिनार बैतूल उत्तर- पश्चिम, बुरहानपुर के डीएफओ सप्लायर्स के इशारे पर अपनी शर्ते अलग से जोड़ दे रहे हैं। कुछ डीएफओ को तो मंत्री के नाम पर शर्तें बदलवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पिछले दिनों एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसमें बुरहानपुर डीएफओ ने बीआईएस की शर्ते जोड़ दी है। जबकि उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई निविदा की शर्तों में बीआईएस की शर्त का उल्लेख नहीं है। चैनलिंक फेंसिंग और बार्बेड वायर की निविदा में शर्त जोड़कर फारेस्ट अफसरों ने महज तीन-चार बड़े कारोबारियों के बीच 70-80 करोड़ का बंदरबांट करना है। मध्य प्रदेश में चैनलिंक फेंसिंग के लिए बीआईएस लाइसेंस केवल दो कंपनियों मौर्य वायर और नवकार ग्रेनाइट्स के पास है। इसी प्रकार बार्बेड वायर के कारोबार में बीआईएस लाइसेंस सिर्फ तीन कंपनियों मौर्य वायर इंदौर, नवकार ग्रेनाइट्स मंदसौर, और मां शारदा वायर मंडला के पास हैं। इसके अलावा चैनलिंक फेंसिंग कोई भी कंपनी बीआईएस लाइसेंस प्राप्त नहीं है।बार्बेड वायर : बीआईएस लाइसेंस चार से पांच कंपनियों के पास है। अन्य डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा में प्रीबीड मीटिंग में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेने और प्रस्तावित चैनलिंक फेंसिंग के कंपार्टमेंट की फोटो अनिवार्य रूप से निविदा प्रपत्र में सबमिट करने के लिए कहा है। अब सवाल यह उठता है कि इंदौर और अन्य शहरों के सप्लायर्स बिना जानकारी के जंगल में स्पॉट कहां ढूंढते फिरेंगे? सूत्रों से खबर यह भी आ रही है कि डीएफओ अपने पसंदीदा सप्लायर के साथ एक फॉरेस्ट गार्ड भेजकर फोटो क्लिक करने में मदद करवा रहे हैं। इसी प्रकार प्रीबिड बैठक से सप्लायर के बीच समझौता होने लगा है और इससे कंपटीशन खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।प्रतिस्पर्धा बढ़े, मध्यम वर्ग को अवसर मिलेवन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने नेक्सस को तोड़ने और लघु एवं मध्यम वर्ग के कारोबारी को अवसर प्रदान करने के लिए पूरे प्रदेश के लिए एक जैसी शर्तें बनवाई। इन शर्तों को तैयार करने में अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक उत्तम शर्मा के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने महीनों मंथन कर एक समान शर्तों का ड्राफ्ट तैयार किया। नई शर्तों का ड्राफ्ट सभी सीसीएफ, सीएफ और डीएफओ को भेजा गया। प्रदेश की कुछ डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा की शर्तों में न तो एकरूपता है और न ही शर्मा कमेटी द्वारा तैयार शर्तों का अक्षरश: पालन किया गया है। वन बल प्रमुख बनने के बाद से असीम श्रीवास्तव को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि टेरिटोरियल में बैठे डीएफओ और सीएफ कमीशन बाजी का खेल खेलने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ रहे हैं। इसके कारण मध्य और लघु कारोबारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं।क्या खरीदी होती हैवन विभाग में हर साल चैनलिंक, वायरवेड, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी, गोबर एवं रासायनिक खाद की खरीदी में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी अनुसंधान एवं विस्तार शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20 प्रतिशत धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू- बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं।राजनीतिक दबाव में बदल दी जाती है शर्तेंमैनेजमेंट कोटे से फील्ड में पदस्थ आईएफएस अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाते हैं। इसके बाद वे सप्लायर्स के अनुसार शर्तें जोड़-घटा कर कमीशनबाजी के खेल से जुड़ हैं। इस खेल में उन्हें तब अफसोस होने लगता है जब उनके खिलाफ जांच शुरू होने हो जाती है। इसी खेल से जुड़े तत्कालीन छतरपुर डीएफओ वन अनुराग कुमार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन कर रहा है। बालाघाट मुख्य वन संरक्षक अरविंद प्रताप सिंह सेंगर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो एक दर्जन से अधिक डीएफओ के खिलाफ शिकायतें विभागीय विजिलेंस में लंबित है।प्रदेश में लागू हो खंडवा फार्मूलाकमीशनबाजी के दौर में खंडवा डीएफओ राकेश डामोर ने एक नया एजेंडा सेट किया है। डामोर ने कारोबारी से टिंबर पोल न खरीद कर उत्पादन डिपो में पड़े टिंबर पल की परचेस की है। ऐसा कर न केवल कमीशन बाजी से गुरेज किया बल्कि विभाग को लाखों रुपए के राजस्व लाभ पहुंचाया। बंबल प्रमुख असीम श्रीवास्तव यदि खंडवा फार्मूला पूरे प्रदेश में लागू कराएं तो विभाग को लाखों रुपया राजस्व राशि प्राप्ति होगी।

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