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Saturday, 7 November 2026
हरदा

धनतेरस पर ग्रामीणों को मिला मालिकाना हक, पटवारियों की मेहनत से पूरी हुई रजिस्ट्री की राह

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-सर्वर ठप होने पर भी देर रात तक जुटे रहे पटवारी
-हितग्राहियों को नि:शुल्क मिला संपत्ति का कानूनी अधिकार
-पंकज, भरत और राजेश विश्नोई की हुई स्वामित्व रजिस्ट्री
– शत-प्रतिशत रजिस्ट्री करने वाले पटवारियों का सम्मान

अनोखा तीर, हरदा। धनतेरस के पावन अवसर पर ग्रामीण परिवारों के लिए खुशियों के साथ संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिलने की सौगात भी आई। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत तहसील हंडिया की ग्राम पंचायत नीमगांव में आयोजित विशेष शिविर में हितग्राहियों की स्वामित्व रजिस्ट्री संपन्न कराई गई। इस उपलब्धि के पीछे प्रशासनिक पहल के साथ पटवारियों की लगातार मेहनत, ग्रामीणों के प्रति सहयोग और जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कलेक्टर कुमार सत्यम ने शत-प्रतिशत रजिस्ट्री निष्पादित करने वाले पटवारी राजीव जैन और धर्मेन्द्र यदुवंशी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। शुक्रवार को आयोजित शिविर में ग्राम नीमगांव, डोमनमऊ, छिड़गांव एवं रेवापुर के हितग्राही शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर की मौजूदगी में पंकज विश्नोई, भरत विश्नोई एवं राजेश विश्नोई की स्वामित्व रजिस्ट्री का कार्य पूरा कराया गया। ग्रामीणों के लिए यह केवल रजिस्ट्री नहीं, बल्कि वर्षों से अपनी संपत्ति पर अधिकार के दस्तावेज मिलने की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
सर्वर ठप, फिर भी नहीं रुका काम, देर रात तक जुटे रहे पटवारी
स्वामित्व रजिस्ट्री के इस अभियान में पटवारियों की कार्यशैली और ग्रामीणों के प्रति उनकी तत्परता विशेष रूप से सामने आई। ग्रामीण पंकज विश्नोई ने शिविर में बताया कि स्वामित्व योजना के तहत उनकी रजिस्ट्री पूरी तरह नि:शुल्क हुई है, जिससे उन्हें करीब 36 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने पटवारी राजीव जैन के कार्य की सराहना करते हुए बताया कि सर्वर और साइट नहीं चलने के बावजूद पटवारी ने देर रात तक काम किया और उनकी रजिस्ट्री पूरी कराई। ग्रामीणों ने कहा कि पटवारी हमेशा सहयोग करते हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त समय देकर ग्रामीणों के काम पूरे कराने में जुटे रहते हैं। यह अनुभव बताता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में मैदानी कर्मचारियों की भूमिका कितनी अहम होती है। समय पर दस्तावेज तैयार करना, तकनीकी बाधाओं के बीच काम जारी रखना और ग्रामीणों को प्रक्रिया में सहयोग देना, पटवारियों की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चार गांवों में शत-प्रतिशत रजिस्ट्री, पटवारियों को मिला सम्मान
तहसीलदार हंडिया पूजा भाटी ने बताया कि ग्राम मिर्जापुर, उड़ावा, छिड़गांव एवं रेवापुर में शत-प्रतिशत स्वामित्व रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस उपलब्धि पर शत-प्रतिशत रजिस्ट्री पूर्ण कराने वाले पटवारी राजीव जैन एवं धर्मेन्द्र यदुवंशी को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष दर्शन सिंह गहलोत, कलेक्टर कुमार सत्यम, अपर कलेक्टर अनुपमा चौहान, एसडीएम शैलेन्द्र बड़ोनिया सहित अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पुश्तैनी जमीन का कानूनी अधिकार ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत
कलेक्टर कुमार सत्यम ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को सम्मान, सुरक्षा और संपत्ति संबंधी अधिकार प्रदान करने की दिशा में सराहनीय पहल है। संपत्ति का विधिवत अभिलेख होने से मालिकाना हक को लेकर सुरक्षा और विश्वास बढ़ता है। पुश्तैनी जमीन का अभिलेखों में कानूनी मालिकाना हक मिलने से ग्रामीणों को विशेष लाभ होगा। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी पुश्तैनी जमीनों की स्वामित्व रजिस्ट्री योजना के तहत अवश्य कराएं, ताकि संपत्ति संबंधी अधिकारों को दस्तावेजी सुरक्षा मिल सके।
रजिस्ट्री के साथ खेती की भी चर्चा, उद्यानिकी अपनाने की सलाह
शिविर के दौरान कलेक्टर ने उपस्थित किसानों से खेती और फसलों की जानकारी भी प्राप्त की। उन्नतिशील किसान राजा विश्नोई ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में अमरूद का बगीचा लगाया है। पहले ही सीजन में करीब तीन लाख रुपये तक के अमरूद विक्रय किए जा चुके हैं और अभी भी बगीचे में फल आ रहे हैं। कलेक्टर कुमार सत्यम ने किसान के प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी एवं औषधीय खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खेती में नए विकल्प अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। धनतेरस पर आयोजित यह शिविर ग्रामीणों को संपत्ति का कानूनी अधिकार देने के साथ ही मैदानी स्तर पर जिम्मेदारी निभाने वाले पटवारियों की मेहनत और जनसेवा के महत्व को भी सामने लाया। तकनीकी बाधाओं के बीच देर रात तक काम कर हितग्राहियों की रजिस्ट्री पूरी कराने वाले कर्मचारियों का सम्मान इस बात का संदेश है कि योजनाओं की सफलता केवल आदेशों से नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाले कर्मचारियों की प्रतिबद्धता से सुनिश्चित होती है।

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