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Friday, 23 October 2026
खरगोन

खबर का असर

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अनोखा तीर ने खोली थी सीसीटीवी घोटाले की पोल
-पंचायतों में सुरक्षा कानून की आड़ में हुई लूट
-बिना टेंडर खरीद और निजी खाते में सरकारी राशि ट्रांसफर करने पर सख्त रुख
-जिला पंचायत ने दिए 7 दिन में जांच के आदेश
इन्ट्रों : दैनिक समाचार पत्र अनोखा तीर में खरगोन जिले की ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के नाम पर हुई वित्तीय लूट और फर्जीवाड़े की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 6 हजार के सामान पर 30 हजार रुपए तक के भुगतान, बिना टेंडर प्रक्रिया और सरकारी राशि सप्लायर फर्म की जगह निजी खाते में डालने के खुलासे पर जिला पंचायत सीईओ मिलिंद कुमार नागदेवे ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी जनपद सीईओ को मूल अभिलेखों व साक्ष्यों सहित 7 दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।  

अनोखा तीर, खरगोन। दैनिक समाचार पत्र अनोखा तीर में प्रमुखता से प्रकाशित समाचार का जिला प्रशासन स्तर पर बड़ा असर हुआ है। खरगोन जिले की ग्राम पंचायतों में मध्य प्रदेश लोक सुरक्षा कानून 2024 की आड़ में हुए सीसीटीवी कैमरा घोटाले को अनोखा तीर द्वारा 18 फरवरी 2026 के अंक में सीसीटीवी के नाम पर पंचायतों में खुली लूट – कैमरा घोटाला शीर्षक से प्रमुखता से उजागर किया गया था। खबर प्रकाशित होने और शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के बाद जिला पंचायत खरगोन हरकत में आ गया है।  मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मिलिंद कुमार नागदेवे ने जिले की सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी कर सात दिवस के भीतर मूल अभिलेखों सहित जांच रिपोर्ट तलब की है।
अनोखा तीर ने उठाया था मुद्दा। 6 हजार की सामग्री पर 30 हजार का भुगतान क्यों?
अनोखा तीर ने अपनी पड़ताल में उजागर किया था कि जिले की 130 से अधिक ग्राम पंचायतों में बाजार भाव से कई गुना अधिक दरों पर सीसीटीवी सामग्री का भुगतान मौखिक आदेशों पर कर दिया गया। बाजार में लगभग 6,000 में मिलने वाले सिस्टम के एवज में पंचायतों से 30,000 प्रति पंचायत तक की भारी-भरकम राशि निकाली गई। खबर में यह भी साफ किया गया था कि न कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, न दर तुलना हुई और कई मामलों में बिना जीएसटी वाले संदिग्ध बिलों पर मुहर लगाकर राशि का आहरण कर लिया गया।
सप्लायर फर्म की जगह निजी खाते में राशि ट्रांसफर होने का बड़ा भंडाफोड़
जांच के आदेश में शिकायत के उन चौंकाने वाले बिंदुओं को शामिल किया गया है, जिनमें सरकारी राशि को किसी अधिकृत सप्लायर फर्म के खाते में न भेजते हुए आईडीबीआई  बैंक के एक निजी खाते (गौतम चौरसिया) में अंतरित किया गया। इसे सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति का अभाव, भंडार क्रय नियमों का सीधा उल्लंघन और संगठित वित्तीय भ्रष्टाचार माना गया है।
सीईओ का 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम
जिला पंचायत सीईओ ने अपने पत्र (क्रमांक 5469/जि.पं./शिकायत/2026) के माध्यम से स्पष्ट आदेश दिया है कि सभी संबंधित ग्राम पंचायतों के मूल रिकॉर्ड, बिल-व्हाउचर, कोटेशन और भुगतान चेकों की गहन पड़ताल की जाए। बिना सक्षम आदेश, अधिक दरों पर हुए आहरण और अनाधिकृत बैंक खातों में राशि भेजने के आरोपों की बिंदुवार जांच हो। स्पष्ट अभिमत एवं अनुशंसा सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से 07 दिवस की समय-सीमा में जिला पंचायत कार्यालय को प्रेषित किया जाए।

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