-माचक, सुकनी, घोंघई और सयानी नदी के साथ सांख्ल्या नाले ने किसानों को पहुंचाया भारी नुकसान
-पटवारी ने सर्वे कर तहसील कार्यालय में सौंपी रिपोर्ट
-आरबीसी 6-4 के तहत राहत राशि का इंतजार
अनोखा तीर, सिराली। सिराली तहसील क्षेत्र में माचक, सुकनी, घोंघई और सयानी नदियों के साथ सांख्ल्या नाले में आई बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बाढ़ से सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। कई खेतों में दो से तीन फीट तक रेत और बजरी जमा होने से जमीन की स्थिति ऐसी हो गई कि वहां दोबारा खेती करना भी चुनौती बन गया है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान महीनों से आर्थिक सहायता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। घोंघई नदी की बाढ़ से प्रभावित खेतों का पटवारी ने मौके पर पहुंचकर सर्वे किया, नुकसान का पंचनामा बनाया और जांच रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत भी कर दी, लेकिन इसके बावजूद किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। एक ओर बर्बाद फसल का नुकसान है, तो दूसरी ओर खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाने की मजबूरी।
पांच नदी-नालों ने किसानों को पहुंचाया नुकसान
सिराली तहसील क्षेत्र में बारिश के दौरान माचक नदी, सुकनी नदी, घोंघई नदी, सयानी नदी और सांख्ल्या नाले में उफान आने से आसपास के खेत प्रभावित हुए। बाढ़ का पानी खेतों में घुसने से फसलों को नुकसान पहुंचा। घोंघई नदी के आसपास के कई खेतों में दो से तीन फीट तक रेत और बजरी जमा हो गई थी। इससे उपजाऊ जमीन नदी के पाट जैसी दिखाई देने लगी। कई किसानों की खड़ी फसल नष्ट हो गई, वहीं रेत और बजरी जमा होने से आगामी फसल की तैयारी करना भी मुश्किल हो गया है।
सर्वे और पंचनामा हुआ, फिर भी राहत नहीं
घोंघई नदी की बाढ़ से प्रभावित खेतों का जुलाई में पटवारी ने मौके पर पहुंचकर सर्वे किया था। किसानों की मौजूदगी में नुकसान का आकलन कर पंचनामा तैयार किया गया और जांच रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत की गई। किसानों को उम्मीद थी कि सर्वे पूरा होने के बाद शासन के प्रावधानों के अनुसार जल्द आर्थिक सहायता मिल जाएगी, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी राहत राशि नहीं मिली है। इससे किसानों में नाराजगी है और वे मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठा रहे हैं।
फसल बर्बाद, अब खेत सुधारने का भी खर्च
बाढ़ से फसल खराब होने के बाद किसानों को अब खेतों से रेत और बजरी हटाने, जमीन समतल करने और दोबारा खेती शुरू करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। जिन किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई, उनके सामने अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री जुटाने की चुनौती है। ऐसे में मुआवजा नहीं मिलने से आर्थिक संकट और गहरा रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर सहायता मिल जाए तो वे खेतों को सुधारकर आगामी सीजन में खेती की तैयारी कर सकते हैं।
आरबीसी 6-4 के तहत सहायता मिलने की उम्मीद
प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के मामले में पात्र किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। प्रभावित किसानों की मांग है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पात्रता की प्रक्रिया पूरी कर जल्द राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। जिन खेतों में बड़ी मात्रा में रेत और बजरी जमा हुई है, वहां नुकसान का उचित आकलन कर किसानों को नियमानुसार सहायता दिलाई जाए, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।
तहसीलदार से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब
मुआवजा वितरण में हो रही देरी का कारण जानने के लिए सिराली तहसीलदार प्रिन्सी जैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में प्रभावित किसानों को अब तक राहत राशि क्यों नहीं मिली और भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है, इस संबंध में प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका। बड़ा सवाल : जब बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत की जा चुकी है, तो पात्र किसानों को अब तक आर्थिक सहायता क्यों नहीं मिली? माचक, सुकनी, घोंघई और सयानी नदियों तथा सांख्ल्या नाले से प्रभावित किसानों को राहत कब मिलेगी?





