-बजरी में मिट्टी मिलाकर बेस बनाने के बाद भी ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं
-जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल
अनोखा तीर, खिरकिया। पोखरनी-कालधड़ मार्ग के निर्माण में गुणवत्ता को लेकर उठे गंभीर सवालों के बाद भी मामले की जांच अब तक अधर में बनी हुई है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे करीब 8 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग में कथित तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और नई बनी पुलियाओं में दरारें आने के आरोप ग्रामीणों ने लगाए थे। मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग के अधिकारी ने जांच कराने और गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक जांच का कोई स्पष्ट नतीजा सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
पोखरनी से कालधड़ होते हुए चारुवा तक बन रहे इस मार्ग पर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए थे। आरोप था कि सड़क का बेस तैयार करने में मिट्टी मिली बजरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं निर्माणाधीन मार्ग पर बनाई गई कुछ नई पुलियाओं में भी दरारें दिखाई देने की बात सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी राजेश पाठक ने कहा था कि मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराई जाएगी और यदि निर्माण कार्य में अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर जांच में इतनी देरी क्यों?
करीब 8 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर लगभग 19 पुलियाओं का निर्माण प्रस्तावित बताया जा रहा है। सड़क निर्माण पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इसमें करीब 3 किलोमीटर सीसी रोड और 5 किलोमीटर डामर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। इतनी बड़ी राशि के प्रोजेक्ट में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की शिकायत सामने आने के बाद भी यदि जांच लंबित रहती है तो यह विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण का काम लगातार आगे बढ़ता रहा और यदि बाद में जांच होती है तो निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की वास्तविक स्थिति का आकलन करना भी मुश्किल हो सकता है।
ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
सड़क निर्माण का ठेका हरदा की ज्योति कंस्ट्रक्शन को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। निर्माण में गुणवत्ता को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद अब ग्रामीणों की निगाह विभागीय जांच और ठेकेदार के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर टिकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी मापदंडों के अनुसार हो रहा है तो विभाग को जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि निर्माण सामग्री में गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए।
क्या मौके से लिए गए सामग्री के सैंपल?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि शिकायत के बाद क्या सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रही बजरी और अन्य सामग्री के नमूने लेकर उनकी तकनीकी या प्रयोगशाला जांच कराई गई? क्या निर्माणाधीन पुलियाओं की गुणवत्ता की तकनीकी जांच हुई? यदि जांच हुई है तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? ग्रामीणों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क के मामले में जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
अधिकारी के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामला सामने आने पर अधिकारी द्वारा स्पष्ट रूप से जांच कराने और गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई थी। इसके बावजूद जांच अभी तक लंबित है। ऐसे में सवाल उठता है कि जांच किस स्तर पर अटकी हुई है? क्या निर्माण सामग्री के नमूने लिए गए हैं? क्या ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया? क्या पुलियाओं में आई दरारों की तकनीकी जांच हुई? और यदि जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
ग्रामीणों की मांग—जांच पूरी कर दोषियों पर हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण में उपयोग की जा रही बजरी, गिट्टी, सीमेंट, डामर सहित अन्य सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला से जांच कराई जाए। साथ ही नई बनी पुलियाओं की गुणवत्ता का भी परीक्षण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक सड़क का नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि और क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा है। यदि निर्माण में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
अब सवाल जांच रिपोर्ट पर
पोखरनी-कालधड़ मार्ग को लेकर सामने आए आरोपों के बाद विभागीय अधिकारी ने जांच का आश्वासन तो दिया, लेकिन जांच अभी तक अधर में है। ऐसे में अब ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आखिर जांच कब पूरी होगी और यदि निर्माण में गड़बड़ी मिली तो ठेकेदार पर कार्रवाई कब होगी? इस संबंध में लोक निर्माण विभाग अधिकारी राजेश पाठक को जानकारी लेने के लिए कॉल किया गया लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया।
करोड़ों की सड़क में घटिया निर्माण के आरोप, जांच अब भी अधर में

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