भाजपा समर्थक प्रत्याशी की करारी हार
भाजपा के लिए चिंताजनक, तो कांग्रेस के लिए उत्साहवर्धक रहे परिणाम
तरुण गौर, सिराली। भाजपा शासित जिला पंचायत हरदा के वार्ड 9 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सरला उईके ने भाजपा समर्थित उमा काजले को 4130 मतों की करारी मात दी है। वैसे तो इस उपचुनाव के परिणामों की अधिकृत घोषणा 5 अक्टूबर को की जाना है। लेकिन विभिन्न मतदान केंद्रों पर प्राप्त मतों की संख्या के अनुसार दोनों प्रत्याशियों को प्राप्त मतों का अंतर स्पष्ट हो चुका है। इस उपचुनाव ने सही मायने में सत्ताधारी दल भाजपा को मैदानी हकीकत का आईना दिखाने का कार्य किया है। इस उप चुनाव में भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा, पूर्व टिमरनी विधायक संजय शाह तथा वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष गजेंद्र शाह सहित भाजपा संगठन द्वारा पूरी ताकत झोंक दी गई थी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की कमान टिमरनी विधायक अभिजीत शाह द्वारा थामी गई थी। इस चुनाव परिणाम में जहां सत्ताधारी दल भाजपा को सोचने पर विवश कर दिया है तो वही कांग्रेस के लिए यह चुनाव परिणाम उत्साहवर्धक साबित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सरला उईके को 8412 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा समर्थित प्रत्याशी उमा काजले को मात्र 3900 मत प्राप्त हुए हैं। इस तरह कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी को 4138 मतों से परास्त किया है। इस जिला पंचायत के उपचुनाव ने आगामी वर्षों में होने वाले ग्राम पंचायत, नगर पंचायत के चुनाव को लेकर तथा 2028 के विधानसभा चुनाव की दृष्टि से सत्ताधारी दल को ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं के रुख से परिचित कराने का कार्य किया है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं तथा जिला पंचायत के कार्य कि मैदानी हकीकत क्या है इसे समझने के लिए यह चुनाव आईना दिखाने वाले साबित हुए हैं।
50 मतदान केंद्रों पर हुआ था मतदान
उपचुनाव में 16 ग्राम पंचायतों के 50 मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ था। करीब 52 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 25,427 मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र बनाए गए थे।
विधायक बोले- जनता की जीत
टिमरनी विधायक अभिजीत शाह ने परिणाम को जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा के जोरदार प्रचार के बावजूद मतदाताओं ने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी को चुना।
राजनीतिक तौर पर इसलिए अहम है परिणाम
वार्ड-9 की सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इससे पहले यहां से जयस समर्थित ताराबाई सूचार निर्वाचित हुई थीं। सरकारी नौकरी मिलने के बाद उनके इस्तीफे के कारण यह उपचुनाव हुआ। भाजपा संगठन की पूरी ताकत के बावजूद 4130 वोट की हार ने अब स्थानीय राजनीतिक हलकों में संगठन की चुनावी रणनीति, बूथ स्तर की पकड़ और ग्रामीण मतदाताओं के रुझान को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। यह परिणाम भविष्य के स्थानीय चुनावों के लिए दोनों दलों के लिए अलग-अलग राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।




