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Sunday, 8 November 2026
हरदा

तप से कर्मों का क्षय, संयम से आत्मशुद्धि का मार्ग

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पर्युषण पर्व के सातवें दिन बड़े मंदिर में धार्मिक आयोजन
-अनिता दीदी ने समझाया उत्तम तप का महत्व

अनोखा तीर, हरदा। पर्वराज पर्युषण के दस दिवसीय आयोजन के सातवें दिवस मंगलवार को श्री दिगंबर जैन समाज हरदा के बड़े मंदिर में उत्तम तप धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। इस अवसर पर कोलकाता से पधारीं अर्हम ध्यान योग प्रशिक्षिका अनिता दीदी ने मुनिश्री प्रणम्य सागर महाराज के डिजिटल संस्करण के माध्यम से श्रद्धालुओं को उत्तम तप धर्म का महत्व समझाया। अनिता दीदी ने कहा कि तप का वास्तविक अर्थ केवल कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए संयमित एवं सहज जीवन जीना है। मनुष्य की इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं और उन्हें पूरा करने की दौड़ में वह स्वयं अनेक कठिनाइयां खड़ी कर लेता है। तप के माध्यम से आत्मा में संचित कर्मों को क्षीण कर जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो कर्म आत्मा को जन्म-मरण के दु:खों में बांधे रखते हैं, उन्हें तप की साधना से क्षीण करना ही उत्तम तप है। इस दौरान उन्होंने संयम, आत्मानुशासन और इंद्रियों पर नियंत्रण को आत्मकल्याण का महत्वपूर्ण आधार बताया।
तीर्थ वंदना में बच्चों से लेकर बड़ों तक ने लिया हिस्सा
पर्युषण पर्व के अंतर्गत अनिता दीदी द्वारा तीर्थ वंदना कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तीर्थ वंदना के दौरान मंदिर परिसर भक्तिभाव से सराबोर रहा। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए गए। पुरस्कार वितरण के पुण्यार्जक साधना कठनेरा एंड ग्रुप रहे, जिसमें ज्योति कठनेरा, सीमा कठनेरा, वैशाली कठनेरा, सरिता कठनेरा एवं रिंकी कठनेरा शामिल हैं। महिला परिषद की ओर से साधना कठनेरा एंड ग्रुप का अभिनंदन करते हुए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। उत्तम तप धर्म की आराधना, आध्यात्मिक संदेश और तीर्थ वंदना कार्यक्रम के चलते बड़े मंदिर में दिनभर धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा।

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