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Friday, 16 October 2026
हरदा

प्राथमिक शिक्षा एवं पर्यावरण पर संगोष्ठी का आयोजन

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-शिशु मंदिर के विद्यालय भवन का होगा लोकार्पण

अनोखा तीर, मसनगांव। प्राथमिक शिक्षा बालकों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है तथा पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन के सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य का आधार है। यह विचार पर्यावरणविद् गौरीशंकर मुकाती ने व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के प्रारंभिक स्तर से ही बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण के संस्कार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को लेकर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्राम में प्राथमिक शिक्षा एवं पर्यावरण विषय पर विशेष परिचर्चा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। अमृत वन फाउंडेशन एवं रूपाई गु्रप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम आज सायं 3.30 बजे स्थानीय नवनिर्मित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में संपन्न होगा। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय भवन के लोकार्पण अवसर पर किया जा रहा है, जिसमें शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार व्यक्त किए जाएंगे। संगोष्ठी में विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के संगठन मंत्री निखिल माहेश्वरी, ग्राम भारती शिक्षा समिति मध्यभारत प्रांत के अध्यक्ष सुजीत शर्मा तथा प्रांत प्रमुख चंद्रहंस पाठक विशेष रूप से उपस्थित रहकर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करने, विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम का प्रेरणादायी पक्ष यह है कि  मुकाती परिवार द्वारा  स्व.श्री राजाराम मुकाती की स्मृति में निर्मित सरस्वती शिशु मंदिर के नवीन भवन का लोकार्पण किया जाएगा। यह भवन ग्राम के बालक-बालिकाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समर्पित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के विकास के लिए किया गया यह योगदान सामाजिक सरोकार और शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जा रहा है। मसनगांव पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में लगातार नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक दायित्व के समन्वय का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी में प्रकृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के संस्कार विकसित होंगे।
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