Skip to content
Monday, 12 October 2026
हरदा

अनुभव की पाठशाला में रंजू सेन ने विद्यार्थियों से साझा किए जीवन के संघर्ष और अनुभव

3 min read
12 2 1
Text Size:

-शिक्षा को सफलता का सबसे बड़ा साधन बताते हुए बच्चों को पढ़ाई के प्रति सजग रहने की दी सलाह

अनोखा तीर, हरदा। ईजी एजूकेशन वैदिक को एड स्कूल द्वारा विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल अनुभव की पाठशाला अंतर्गत प्रथम अतिथि के रूप में श्रीमती रंजू सेन ने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की शिक्षा के लिए किए गए प्रयासों को साझा किया। रंजू सेन का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। विवाह के समय पारिवारिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं। विवाह के बाद उन्होंने घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ अपने पति का सहयोग करने के लिए छोटे-मोटे काम किए। बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से उन्होंने सफाई कार्य सहित विभिन्न कार्य किए और निरंतर मेहनत करती रहीं। उनकी दिनचर्या उनके परिश्रम और जिम्मेदारी का उदाहरण है। वह सुबह लगभग चार बजे उठकर घर के काम पूरे करती हैं और फिर काम पर जाती हैं। दिनभर की थकान के बाद घर लौटकर भी परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाती हैं।
शिक्षक की डांट के कारण छूटी पढ़ाई, आज भी है पछतावा
संवाद के दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने पाँचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। एक शिक्षक की डाँट से आहत होकर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। आज उन्हें इस निर्णय का पछतावा है। उनका मानना है कि यदि उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी होती, तो संभवत: वह सरकारी नौकरी कर रही होतीं, अपना व्यवसाय चला रही होतीं या किसी अन्य क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकती थीं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे किसी कठिन परिस्थिति, डाँट या असफलता के कारण पढ़ाई न छोड़ें, क्योंकि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
पिछले 11 वर्षों से वैदिक स्कूल में अध्ययनरत हैं उनके बच्चे
रंजू सेन के बच्चे पिछले 11 वर्षों से वैदिक स्कूल में अध्ययन कर रहे हैं। विद्यालय से इतने लंबे समय तक जुड़े रहने के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ वैदिक एवं नैतिक संस्कार भी मिलते हैं। उनके अनुसार, इन वर्षों में बच्चों को ट्यूशन भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ी और उनके दोनों बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में टॉपर रहे हैं। उन्होंने विद्यालय की व्यक्तिगत शिक्षण व्यवस्था, प्रत्येक बच्चे पर ध्यान देने, शिक्षकों एवं प्राचार्य से सहज संपर्क तथा शिक्षा में नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों के समग्र विकास के लिए प्रयास करता है और अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा से जुड़ने के अवसर प्रदान करता है।
जीवन के अनुभवों से सीखने की पहल
विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए रंजू सेन ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए इस प्रकार के प्रयास महत्त्वपूर्ण हैं। अनुभव की पाठशाला के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न लोगों के जीवन, कार्यक्षेत्र, संघर्ष और अनुभवों को समझ सकेंगे तथा अपने भविष्य और करियर के प्रति अधिक जागरूक बन सकेंगे। विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि प्रत्येक ईमानदार कार्य सम्मान के योग्य है और सफलता के लिए शिक्षा, मेहनत, अनुशासन तथा निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को माता-पिता के संघर्षों और त्याग को समझने तथा जीवन के वास्तविक अनुभवों से प्रेरणा लेने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ संवाद एवं साक्षात्कार विद्यालय के प्राचार्य दिलीप कुमार मालवीय द्वारा लिया गया। इस अवसर पर शिक्षिकाएँ सोनाली चौहान, आरती मालवीय एवं ज्योति गौर सहित विद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

0 Views
What do you think?

Leave a Reply