-खिरकिया कृषि उपज मंडी में लाखों रुपए के कार्य में हुआ बड़ा गड़बड़झाला
अनोखा तीर, खिरकिया। खिरकिया कृषि उपज मंडी में निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंडी परिसर स्थित शेड नंबर-1 के पुनर्निर्माण के नाम पर किए गए कार्य को लेकर किसानों ने गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि करीब 25 लाख रुपए के फंड से किए गए शेड के पुनर्निर्माण कार्य में जहां नए टीन लगाए जाने थे, वहीं कुछ स्थानों पर नए टीन के साथ पुराने टीन का भी उपयोग किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जिस कार्य के लिए मंडी बोर्ड द्वारा बड़ी राशि स्वीकृत की गई, उसमें वास्तविक रूप से कितना नया कार्य हुआ और कितनी सामग्री का उपयोग किया गया। इसी प्रकार मंडी परिसर की बाउंड्रीवाल की मरम्मत एवं रंगरोगन पर भी करीब 25 लाख रूपए खर्च किए गए हैं। इस कार्य में भी सीमेंट, लोहे के सरिए के बड़े-बड़े बिल निकाले गए हैं। साथ ही रंग-पुताई के नाम पर घटिया काम हुआ। करीब 25-25 लाख रूपए के इन दोनों की कामों में मंडी निरीक्षक प्रेमनारायण उज्जैनिया की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। किसानों ने मामले में मंडी बोर्ड के अधिकारियों से जांच की मांग उठाई है। किसानों के अनुसार शेड नंबर-1 मंडी परिसर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां कृषि उपज लेकर आने वाले किसानों को अपनी उपज की बिक्री एवं अन्य गतिविधियों के दौरान सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में शेड के पुनर्निर्माण के कार्य में गुणवत्ता और स्वीकृत मापदंडों का पालन होना बेहद जरूरी है। लेकिन मापदंड अनुसार कार्य नहीं हुआ है। किसानों का कहना हैं कि यदि पुनर्निर्माण के नाम पर पुराने टीन को ही नए कार्य में शामिल किया गया है तो इसकी जांच आवश्यक है। मौके पर हुए वास्तविक कार्य और विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज कार्य का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। मंडी में यह दोनों कार्य मंडी निरीक्षक एवं निर्माण शाखा प्रभारी प्रेम नारायण उज्जैनिया की मॉनिटरिंग में हुए हैं। हालांकि मीडिया से चर्चा में श्री उज्जैनिया ने निर्माण शाखा प्रभारी होने से पल्ला झाड़ लिया है।
25 लाख के कार्य की जांच की मांग
मामले को लेकर किसानों ने मांग की है कि शेड नंबर-1 के पुनर्निर्माण कार्य से जुड़े स्वीकृति आदेश, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, उपयोग की गई सामग्री तथा भुगतान की पूरी जानकारी की जांच कराई जाए। साथ ही मौके पर भौतिक सत्यापन कर यह देखा जाए कि स्वीकृत राशि के अनुरूप वास्तव में कितना कार्य किया गया है। किसानों का कहना है कि दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
बाउंड्रीवाल की मरम्मत और रंगाई-पुताई पर भी सवाल
शेड नंबर-1 के कार्य के साथ ही मंडी परिसर की बाउंड्रीवाल की मरम्मत एवं रंगाई-पुताई के कार्य को लेकर भी किसानों ने सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि इस कार्य में भी खर्च की गई राशि और मौके पर दिखाई देने वाले कार्य के बीच अंतर की जांच की आवश्यकता है। बाउंड्रीवाल की मरम्मत में किस स्तर का कार्य स्वीकृत था, कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी सामग्री खरीदी गई और वास्तव में कितना कार्य कराया गया, इन सभी बिंदुओं का परीक्षण किए जाने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि यदि एक ही मंडी परिसर में अलग-अलग निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो विभागीय स्तर पर केवल कागजी जांच के बजाय मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कार्य में निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मापदंडों का पालन हुआ है या नहीं।
मंडी निरीक्षक की शाखा से जुड़े कार्यों की भी हो जांच
किसानों ने मंडी के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मंडी निरीक्षक प्रेमनारायण उज्जैनिया की शाखा से संबंधित निर्माण, मरम्मत एवं अन्य कार्यों की भी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। श्री उज्जैनिया मंडी में निर्माण शाखा प्रभारी भी हैं, किसानों का कहना है कि जांच किसी स्थानीय स्तर के अधिकारी तक सीमित न रहे, बल्कि मंडी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों अथवा स्वतंत्र जांच दल के माध्यम से कराई जाए, जिससे जांच की निष्पक्षता बनी रहे। किसानों के मुताबिक शेड पुनर्निर्माण और बाउंड्रीवाल की मरम्मत एवं रंगाई-पुताई जैसे कार्यों में यदि स्वीकृत राशि के अनुरूप कार्य नहीं हुआ है अथवा सामग्री के उपयोग में कोई अंतर है तो उसका जिम्मेदार कौन है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए पूरे प्रकरण की फाइल से लेकर मौके पर हुए निर्माण तक प्रत्येक स्तर की जांच जरूरी है।
दस्तावेज और मौके की स्थिति का हो मिलान
किसानों ने मांग की है कि शेड नंबर-1 के पुनर्निर्माण एवं बाउंड्रीवाल के कार्यों की जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों के साथ मौके की स्थिति का मिलान कराया जाए। स्वीकृत कार्य की मात्रा, टीन की वास्तविक संख्या, पुराने और नए टीन का विवरण, खरीदी गई सामग्री, भुगतान किए गए बिल तथा माप पुस्तिका में दर्ज कार्य की जांच की जाए। इसी प्रकार बाउंड्रीवाल की मरम्मत और रंगाई-पुताई में उपयोग की गई सामग्री एवं खर्च का भी भौतिक सत्यापन कराया जाए।
उच्च स्तरीय जांच से सामने आ सकता है पूरा सच
कृषि उपज मंडी किसानों से सीधे जुड़ी संस्था है और यहां होने वाले निर्माण एवं विकास कार्यों में खर्च होने वाली राशि भी किसानों से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे में किसानों का कहना है कि मंडी बोर्ड को प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। फिलहाल शेड नंबर-1 के पुनर्निर्माण और मंडी परिसर की बाउंड्रीवाल की मरम्मत एवं रंगाई-पुताई के कार्यों को लेकर किसानों द्वारा उठाए गए सवालों ने मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू कर दी है। अब देखना यह होगा कि मंडी के वरिष्ठ अधिकारी किसानों की मांग को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या इन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराकर स्वीकृत राशि से लेकर मौके पर हुए कार्य तक का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाता है।
इनका कहना है….
मेरे पास निर्माण शाखा का प्रभार नहीं है, आप चाहे तो सोमवार को मंडी कार्यालय आकर रिकॉर्ड में देख सकते हैं।
प्रेम नारायण उज्जैनिया, मंडी निरीक्षक, खिरकिया।
मंडी में टीन शेड के पुनर्निर्माण और बाउंड्रीवॉल की मरम्मत एवं रंग पुताई का कार्य मेरी जॉइनिंग के पहले का है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। मैं सोमवार को फाइल दिखवाता हूँ। मंडी निर्माण शाखा प्रभारी प्रेमनारायण उज्जैनिया ही हैं।
राजेश साकेत, सचिव, कृषि उपज मंडी समिति खिरकिया।




