अनोखा तीर, करताना। श्राद्ध पक्ष की नवमी के दिन से अबोला व्रत की शुरुआत होती है। इस दिन महिलाओं द्वारा ज्वारे बोए जाते हैं और रोजाना उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। नौ दिनों तक महिलाओं द्वारा अबोला रहकर पूजा-पाठ की जाती है। रविवार को इन ज्वारों का विसर्जन किया गया। नर्मदा घाट लछोरा पर विसर्जन किया गया। महिला गायत्री बाई मौर्य ने बताया कि यह व्रत भगवान शिव-पार्वती की आराधना से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए महिलाओं द्वारा इस व्रत को किया जाता है। उन्होंने बताया कि व्रत करने वाली महिलाएं सुबह मौन रहकर फूल-पत्ती एकत्र करती हैं और जब पूजन करती हैं तब भी अबोला रहता है। इस दौरान भगवान शिव-पार्वती की पूजा पाठ कर उनका पूजन किया जाता है। यह नौसर के मौर्य परिवार द्वारा कराया जा रहा है। वहां रहने वाली महिलाएं एक घर में सामूहिक पूजन-पाठ करती हैं।
करताना में अबोला व्रत का समापन, ज्वारों का किया विसर्जन






