रातभर फूल चुनते हैं युवा, दिनभर बनाते हैं मालाएं
-28 वर्षों से भीलट बाबा समिति निभा रही परंपरा
-ढोल-बाजों के साथ माताजी को अर्पित की जाती हैं मालाएं
अनोखा तीर, खिरकिया। नगर का दुर्गोत्सव अपने अनूठे पंडालों, आकर्षक सजावट और कलाकृतियों के लिए समूचे प्रदेश में पहचान रखता है। वहीं, यहां युवाओं की माता रानी के प्रति भक्ति भी अनूठी है। नवरात्रि में युवा रातभर दूर-दराज के गांवों, खेतों और जंगलों से फूल एकत्रित करते हैं। इसके बाद दिनभर बैठकर इन फूलों से सुंदर मालाएं तैयार की जाती हैं और शाम को ढोल-बाजों के साथ शोभायात्रा निकालकर माता रानी को अर्पित किया जाता है। किसान मोहल्ला की श्री भीलट बाबा फूल माला समिति सहित नगर की कई समितियां वर्षों से इस सेवा परंपरा को निभा रही हैं।
रातभर जागकर चुनते हैं फूल, दिनभर बनाते हैं मालाएं
नवरात्रि शुरू होने से लेकर दशहरे तक युवाओं की दिनचर्या माता रानी की सेवा में ही गुजरती है। युवा रातभर फूल एकत्रित करने के लिए निकलते हैं और दिन में मालाएं बनाने में जुट जाते हैं। माला तैयार होने के बाद शाम को उसे ढोल-बाजों के साथ अलग-अलग दुर्गा पंडालों तक ले जाकर माता रानी को अर्पित किया जाता है। इसके बाद युवा फिर रात में फूल चुनने के लिए निकल पड़ते हैं। इस तरह नौ दिनों तक उनकी भक्ति और सेवा का सिलसिला लगातार जारी रहता है। समिति के सदस्यों के अनुसार, युवाओं की टोलियां फूल एकत्रित करने के लिए हरदा, टिमरनी, छिदगांव, पगढाल, बानापुरा, भैरोंपुर और डोलरिया सहित आसपास के क्षेत्रों में जाती हैं। इसके अलावा सिवनी, खातेगांव, इटारसी, छनेरा और चारखेड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों से भी फूल लाए जाते हैं। मालाएं बनाने में मुख्य रूप से सफेद चकरी के फूलों का उपयोग किया जाता है। इनके साथ गुलाब, मोगरा और गुड़हल सहित अन्य फूलों से मालाओं को आकर्षक रूप दिया जाता है।
28 वर्षों से निभा रहे परंपरा
किसान मोहल्ला स्थित श्री भीलट बाबा फूल माला समिति के सदस्यों ने बताया कि समिति पिछले 28 वर्षों से नि:शुल्क फूल मालाएं बनाकर माता रानी को अर्पित कर रही है। नगर में इस सेवा कार्य से कई मंडल जुड़े हुए हैं। प्रत्येक मंडल में लगभग 40 से 50 सदस्य शामिल हैं, जो अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सेवा देते हैं। नगर में करीब दो दर्जन स्थानों पर देवी प्रतिमाओं को मालाएं अर्पित की जाती हैं। इसके लिए लगभग आधा दर्जन से अधिक मंडल सक्रिय हैं। समिति के सदस्यों के अनुसार, पहले रात में फूल एकत्रित करने के दौरान युवाओं को कई बार पुलिस रोक लेती थी। अब पहचान के लिए पुलिस थाने से पहचान पत्र भी जारी किए जाते हैं। कुछ श्रद्धालु इस दौरान नंगे पैर रहकर और अन्न ग्रहण न करके भी अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
शुभ आकृतियों में तैयार की जाती हैं मालाएं
इन मालाओं की खासियत केवल फूलों की सुंदरता ही नहीं, बल्कि उनकी अनूठी बनावट भी है। युवा मालाओं को स्वस्तिक, कलश, शुभ-लाभ, पगलिये और त्रिशूल जैसी शुभ आकृतियों में तैयार करते हैं। इनकी सजावट और कलात्मक स्वरूप इन्हें विशेष बनाते हैं। हर माला को तैयार करने में युवाओं की मेहनत, लगन और श्रद्धा दिखाई देती है। पहले समितियों द्वारा मुख्य रूप से खिरकिया नगर के दुर्गा पंडालों में मालाएं अर्पित की जाती थीं, लेकिन अब समिति के सदस्य अपने खर्च पर हरदा, होशंगाबाद सहित अन्य शहरों में भी माता रानी को मालाएं भेंट करने पहुंचते हैं।
युवाओं ने संभाल रखी है परंपरा की जिम्मेदारी
नवरात्रि में फूल चुनने से लेकर मालाएं बनाने और उन्हें माता रानी को अर्पित करने तक युवा पूरी श्रद्धा से जुटे रहते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामूहिक सहयोग, सेवा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का उदाहरण भी है। युवाओं ने अपनी मेहनत और समर्पण से इस परंपरा को जीवंत रखा है, जिससे हर वर्ष नवरात्रि में खिरकिया की भक्ति का यह अनूठा स्वरूप देखने को मिलता है।







