Skip to content
Saturday, 17 October 2026
हरदा

एग्रीटेक आईडी से नहीं मिला डाटा, मात्र 10 किसानों का हुआ पंजीयन

4 min read
26 1 5
Text Size:

-आज अंतिम तारीख, तकनीकी खामी के चलते योजना के लाभ से वंचित होने की चिंता
-पंजीयन अवधि बढ़ाने की मांग

अनोखा तीर, मसनगांव। सोयाबीन को भावांतर योजना में शामिल कर किसानों को राहत देने की सरकार की पहल तकनीकी खामियों के चलते परेशानी का कारण बन गई है। योजना के तहत सोयाबीन पंजीयन के लिए 3 से 17 अक्टूबर तक की समय सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन एग्रीटेक आईडी से किसानों के रकबे का डाटा मैच नहीं होने के कारण पंजीयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। मसनगांव समिति में बनाए गए दो पंजीयन केंद्रों पर अब तक मात्र 10 किसान ही पंजीयन करा पाए हैं। कई किसान केंद्रों के चक्कर लगाने के बावजूद पंजीयन नहीं करा सके हैं। स्थिति यह है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने में अब केवल एक दिन शेष है, लेकिन तकनीकी समस्या का समाधान नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को भी एग्रीटेक आईडी से डाटा मैच नहीं होने के कारण एक भी किसान का पंजीयन नहीं हो सका। किसान पंजीयन कराने के लिए केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उन्हें बिना पंजीयन लौटना पड़ रहा है।
नई व्यवस्था में उलझा किसानों का पंजीयन
पिछले वर्ष किसानों के खेतों के रकबे का गिरदावरी से मिलान कर पंजीयन किया गया था, लेकिन इस साल शासन ने एग्रीटेक आईडी के आधार पर डाटा मिलान की व्यवस्था लागू की है। इसके चलते किसानों के रकबे का मिलान नहीं हो पा रहा है और पंजीयन प्रक्रिया अटक रही है। व्यवस्था में बदलाव के बाद तकनीकी समस्या का समय पर समाधान नहीं होने से इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। भावांतर योजना का लाभ लेने के लिए किसान निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर डाटा मैच नहीं होने से उनकी कोशिशें नाकाम हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पंजीयन के लिए सीमित समय दिया गया है, तो तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए पहले से पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
आज अंतिम तारीख, किसानों को सता रही चिंता
भावांतर योजना में पंजीयन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर निर्धारित है। ऐसे में जिन किसानों का पंजीयन तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है, उनके सामने योजना के लाभ को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। किसान राकेश पाटिल और आनंद पाटिल ने बताया कि पंजीयन नहीं होने से वे भावांतर योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं। भले ही इस साल सोयाबीन के बाजार भाव समर्थन मूल्य के आसपास या उससे ऊपर बने हुए हैं, लेकिन किसानों को भविष्य की फसलों को लेकर भी चिंता है।  किसानों का कहना है कि आगामी समय में गेहूं, चना और मूंग जैसी फसलों के दौरान भी समर्थन मूल्य और बाजार भाव के बीच अंतर की स्थिति बन सकती है। ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पंजीयन जरूरी है। यदि तकनीकी समस्या के कारण किसान समय पर पंजीयन नहीं करा पाएंगे, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अधिकारियों को दी सूचना, समाधान का इंतजार
समिति कर्मचारी जगदीश बास्या ने बताया कि किसानों की एग्रीटेक आईडी से रकबे का डाटा मैच नहीं होने के कारण पंजीयन में परेशानी आ रही है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को सूचना दे दी गई है, लेकिन तकनीकी समस्या दूर नहीं हो सकी, जिस कारण मात्र 10 किसानों का ही पंजीयन हो सका है। किसानों का सवाल है कि जब पंजीयन की अंतिम तारीख नजदीक है, तो तकनीकी समस्या का समाधान कब होगा। किसानों ने मांग की है कि पंजीयन में आ रही परेशानी को तत्काल दूर किया जाए और तकनीकी खामी के कारण पंजीयन से वंचित किसानों को राहत देने के लिए अंतिम तारीख बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी किसान केवल सिस्टम की गड़बड़ी के कारण योजना के लाभ से वंचित न रहे।

0 Views
What do you think?

Leave a Reply