-भूजल स्तर बढ़ाने की योजना में लापरवाही
-गोमगांव और पीपल्या खुदिया में जल संरक्षण के इंतजाम फेल
-पानी रुका नहीं तो कैसे रिचार्ज होंगे किसानों के जलस्रोत?
तरुण गौर, सिराली। भूजल संरक्षण और जलस्तर बढ़ाने के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन निर्माण कार्यों में लापरवाही और रखरखाव के अभाव में योजनाओं का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पा रहा है। खिरकिया विकासखंड की ग्राम पंचायत गोमगांव और पीपल्या खुदिया में बनाए गए स्टॉपडेम इसकी बानगी हैं। कहीं स्टॉपडेम की दीवार पहली बारिश में ही बह गई तो कहीं निर्माण क्षतिग्रस्त होने के साथ गेट भी नहीं लगाए गए। नतीजा यह कि बारिश का पानी रोककर भूजल स्तर बढ़ाने की योजना जमीन पर दम तोड़ रही है। लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद पानी का संचय नहीं हो पा रहा है। इससे आसपास के किसानों के कुएं और अन्य जलस्रोतों के रिचार्ज होने की उम्मीद भी अधूरी रह गई है। निर्माण की गुणवत्ता से लेकर जिम्मेदारों की निगरानी तक पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला-1
पहली बारिश में बह गई स्टॉपडेम की दीवार
ग्राम पंचायत गोमगांव द्वारा घोंघई नदी पर स्टॉपडेम का निर्माण कराया गया था। लेकिन इसकी दीवार पहली बारिश का दबाव भी नहीं झेल सकी और बह गई। निर्माण के दौरान दीवार का बेस मजबूत नहीं बनाए जाने की बात सामने आई है। स्थिति यह है कि दीवार क्षतिग्रस्त होने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते नदी में पानी रोकने की व्यवस्था नहीं बन पाई। यदि निर्माण गुणवत्तापूर्ण होता और समय पर मरम्मत कराई जाती तो बारिश के पानी को रोककर आसपास के भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिल सकती थी। अब सरकारी राशि से बना ढांचा अनुपयोगी साबित हो रहा है।
मामला-2
पीपल्या खुदिया में 5 लाख खर्च, फिर भी नहीं रुक रहा पानी
ग्राम पंचायत पीपल्या खुदिया में गोपाल के खेत के पास मनरेगा के तहत करीब 5 लाख रुपए की लागत से स्टॉपडेम का निर्माण कराया गया था। लेकिन यह भी क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, स्टॉपडेम में गेट नहीं लगाए जाने से पानी को रोककर रखने की व्यवस्था नहीं हो सकी। बारिश का पानी जमा होने के बजाय बहकर निकल रहा है। इससे भूजल संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। स्टॉपडेम से आसपास के किसानों को जलस्तर बढ़ने और जलस्रोत रिचार्ज होने की जो उम्मीद थी, उस पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है।
निर्माण के बाद निगरानी और मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी?
दोनों ग्राम पंचायतों में सामने आई स्थिति ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जल संरक्षण के लिए मनरेगा और 14वें वित्त आयोग की राशि से बनाए गए स्टॉपडेम यदि पानी रोकने में ही सक्षम नहीं हैं, तो इन पर खर्च की गई राशि का लाभ ग्रामीणों को कैसे मिलेगा? गोमगांव में टूटी दीवार की मरम्मत नहीं होना और पीपल्या खुदिया में गेट नहीं लगाए जाने से पानी का संचय नहीं होना, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच करे, क्षतिग्रस्त स्टॉपडेम की मरम्मत कराए और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करे।





